September 27, 2025

शारदीय नवरात्र का पांचवां दिन आज, पंचमी पर होगी मां स्कंदमाता की पूजा


Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्र का आज पांचवां दिन है। पंचमी तिथि पर मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि स्कंदमाता की उपासना करने से जीवन की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और भक्त को सुख-शांति प्राप्त होती है।

मां स्कंदमाता का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि उनकी कृपा से भक्त को सुख-समृद्धि के साथ दिव्य ज्ञान और शांति की प्राप्ति होती है। श्रद्धा भाव से की गई उनकी आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 4:36 बजे से 5:24 बजे तक
प्रातःकालीन संध्या – सुबह 5:00 बजे से 6:12 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:48 बजे से 12:36 बजे तक
संध्या पूजा मुहूर्त – शाम 6:30 बजे से 7:42 बजे तक
इन मुहूर्तों में मां की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

मां स्कंदमाता का स्वरूप

शास्त्रों के अनुसार मां स्कंदमाता सिंह पर सवार होती हैं और चार भुजाओं वाली हैं। उनके दो हाथों में कमल पुष्प रहते हैं, एक हाथ से वे वरद मुद्रा में आशीर्वाद देती हैं और उनकी गोद में बालरूप कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

पूजा विधि और भोग

पंचमी के दिन भक्तों को मां के श्रृंगार में शुभ रंगों का प्रयोग करना चाहिए। पूजा के दौरान कुमकुम, अक्षत, पुष्प, चंदन और फल अर्पित करें तथा घी का दीपक जलाकर स्तुति करें।
इस दिन मां को विशेष रूप से केले का भोग लगाने का महत्व है। मान्यता है कि केले का प्रसाद ब्राह्मण को दान करने से बुद्धि का विकास होता है और साधक जीवन में प्रगति करता है। साथ ही परिवार में सुख, शांति और वैभव बढ़ता है।



Advertisement

Tranding News

Get In Touch