Shardiya Navratri 4th Day Maa Kushmanda Puja Vidhi: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की उपासना का विधान है। मान्यता है कि मां कुष्मांडा की पूजा करने से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, यश और बल की प्राप्ति होती है। साथ ही भक्त को मनोवांछित फल भी मिलते हैं।
सबसे पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें।
मां कुष्मांडा का ध्यान करते हुए उनके मंत्र का जाप करें:
"या देवी सर्वभूतेषु कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।"
मां को हरे रंग के वस्त्र और हरी चूड़ियां अर्पित करें।
मां को मालपुआ का भोग लगाना विशेष फलदायी माना गया है। इसके साथ ही खीर, हलवा और फल भी अर्पित किए जा सकते हैं।
मां को लाल फूल, गुड़हल का फूल और हरी इलायची अवश्य चढ़ाएं।
अंत में मां की आरती करें और फिर दान-पुण्य करें।
पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करें:
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः।
या देवी सर्वभूतेषु कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दुर्गा कूष्माण्डा स्तुति
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद, प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वम्, त्वमीश्वरी देवी चराचरस्य।।
वन्दे वांछित कामार्थे चंद्रार्धकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्।।
दुर्गतिनाशिनीं दुर्गां कूष्माण्डां प्रणमाम्यहम्।
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
ऊं देवी कूष्माण्डायै नमः।।
मां कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी कहा जाता है क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। वह सिंह पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला शोभा पाती है।
मान्यता है कि मां कुष्मांडा की आराधना करने से –
जीवन से सभी प्रकार के रोग, कष्ट और परेशानियां दूर होती हैं।
भक्त को शक्ति, यश, बल और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
आयु में वृद्धि होती है और मानसिक शांति मिलती है।