नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर 16 घंटे लंबी मैराथन बहस होने जा रही है। यह बहस दोपहर 12 बजे से शुरू होगी, जो जरूरी दस्तावेजों के संसद में प्रस्तुत किए जाने के बाद शुरू की जाएगी। चर्चा की शुरुआत खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हस्तक्षेप कर सकते हैं और अपना पक्ष रख सकते हैं।
सरकार इस बहस में आक्रामक रुख के साथ भाग लेगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बहस से पहले CDS जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। इन बैठकों में चर्चा की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया है।
'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर विपक्षी गठबंधन INDIA भी सक्रिय हो गया है। चर्चा से पहले विपक्षी दलों की एक संयुक्त बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस मुद्दे पर साझा रणनीति पर मंथन होगा। विपक्ष सरकार से इस सैन्य अभियान से जुड़े तथ्यों और फैसलों पर जवाब मांग रहा है।
'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत 7 मई को उस समय हुई थी, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने एक तीव्र और सटीक सैन्य कार्रवाई की।
सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, यह ऑपरेशन केवल 22 मिनट में पूरा कर लिया गया और इसमें सभी आतंकियों को सफलतापूर्वक मार गिराया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे "विजय उत्सव" करार देते हुए भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का प्रतीक बताया था।
हालांकि सरकार इसे 100 प्रतिशत सफल सैन्य अभियान बता रही है, लेकिन विपक्ष ऑपरेशन की समय-सीमा, कार्रवाई की पारदर्शिता और सैन्य निर्णयों की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष यह जानना चाहता है कि इतनी संवेदनशील कार्रवाई में राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका क्या रही।