February 04, 2024

राजधानी रायपुर में राजस्व और नगर निगम के निचले अमलों के संरक्षण में चल रहा है अवैध प्लाटिंग का बड़ा खेल


RNN24 Exclusive

पंकज विश्वकर्मा, समाचार संपादक

रायपुर।  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जमीनों का करोबार हजारों करोड़  रुपए तक पहुंच चुका है, जिसमें वह बमुश्किल 15 से 20 प्रतिशत ही सभी शासकीय कानूनों का पालन कर किया जाता है, जबकि 70 से 80 प्रतिशत तक जमीनों का कारोबार अवैध रूप से संचालित किया जा रहा है।  जिसमें राजस्व अमले के पटवारी आर. आई. और नगर निगम के सब इंजीनियर, नगर निवेश सहित राजस्व अधिकारियों का खुला संरक्षण मिला हुआ है।

 लगातार विस्तार लेता हुआ राजधानी रायपुर दो नगर निगम के स्वामित्व सहित 70 से ज्यादा ऐसे गांव भी शामिल हैं जो अभी तक रायपुर नगर निगम या बिरगांव नगर निगम में शामिल नहीं है उन जगहों पर अवैध प्लांटिंग जोर-शोर से चालू है। 2 दिन पहले ही रायपुर नगर निगम के नए आयुक्त ने बैठक लेकर जोन क्रमांक 9 एवं जोन क्रमांक 10 में हो रही अवैध प्लाटिंग को रोकने के लिए बैठक लेकर निगम के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए हैं।  परंतु इस पर अमल कब तक होगा यह कहां नहीं जा सकता। 


कल ही जब आर.आर.रन 24 की टीम पुराना धमतरी रोड के डूंडा और उसके आगे का गांव का दौरा कर रही थी तो कई इलाकों में बहुत बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग दिखाई दी,परंतु स्थानीय पटवारी और निगम के अमलों  को यह क्यों नहीं दिखाई देती।  डूंडा चौक पर ही 7 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है। शासकीय गाइडलाइन के अनुसार 573/- प्रति वर्ग फीट की भूमि 1500/- से लेकर 1800/- र तक प्रति वर्ग फुट बेची जा रही है।


शासकीय गाइडलाइन दर से ही पैसों का लेन-देन चेक के माध्यम से किया जाता है और बाकी की रकम नकद लेनदेन के रूप में ली जाती है। इससे स्पष्ट पता चलता है की न सिर्फ राज्य एवं केंद्र के राजस्व की क्षति की जाती है बल्कि करोड़ों रुपए से ज्यादा काले धन का उपार्जन भी किया जाता है। इस काले धन के रूप में प्राप्त राशि का क्या उपयोग किया जाता है यह एक गंभीर प्रश्न है।  राज्य और केंद्र की कई एजेंसियां लगातार छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार सहित काले धन को रोकने के लिए प्रयासरत है।  परंतु जमीनों के अवैध कारोबार से प्राप्त होने वाला काले धन का क्या उपयोग किया जा रहा है यह अति गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।  इन अवैध प्लाटिंग का न हीं नगर निवेश से अनुमोदन कराया जाता है, ना ही कॉलोनाइजर लाइसेंस और रेरा में रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है।  छत्तीसगढ़ राज्य की एसीबी जब ऐसों मामलों की विवेचना करेगी तो कई बड़े मगरमच्छ सामने आएंगे और पता चल सकेगा कि कहीं इस काले धन का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलवाड़ के रूप में तो नहीं किया जा रहा है। 

हम इस प्रकार के मामलों की विस्तृत रिपोर्ट लेकर बहुत जल्द ही रेरा, नगर निवेश, नगर निगम, राजस्व सहित ए.सी.बी के सामने रखेंगे ताकि नियमानुसार विवेचना और कार्यवाही शुरू हो सके। साथ ही हम अपने पाठकों और दर्शकों को सामने भी एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट भी लेकर आयेंगे ताकि वे अपने हितों का ध्यान रखें।



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