पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़. छत्तीसगढ़ के अपेक्स बैंक जिसे आधिकारिक तौर पर छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के नाम से जाना जाता है, छत्तीसगढ़ में सहकारी बैंकिंग के क्षेत्र में सबसे बड़ी और एक प्रमुख संस्था है, जो ग्राहकों को विभिन्न प्रकार की बैंकिंग सेवाएं प्रदान करती है और राज्य की आर्थिक समृद्धि में योगदान देती है।
बैंक का मुख्यालय रायपुर में है और यह कभी अपनी वित्तीय स्थिरता और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए जानी जाती थी। आज स्थिति उलट है। आज अपेक्स भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का अड्डा बन गया है। सहकारी समितियों को धान खरीदी के वक्त टारगेट दे कर वसूली की जाती है। आज अपेक्स बैंक के लिए अति महत्वपूर्ण दिन है।
आज अपेक्स बैंक की वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting) है। यह बैंक के शेयरधारकों, सहकारी समितियों, ग्राहकों और उसके निदेशक मंडल की एक औपचारिक बैठक है। जो साल में एक बार आयोजित की जाती है, जिसमें बैंक के पिछले प्रदर्शन, भविष्य की योजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक मामलों पर चर्चा की जायेगी। आज आयोजित ए.जी.एम. के कई महत्वपूर्ण पहलू और प्रश्न है।
क्या बैंक के उच्चतर प्रबंधन की कार्यशैली और आगामी कार्ययोजना पारदर्शिता, जवाबदेही से परिपूर्ण है ? क्योंकि बैंक की साख और क्रियाकलाप पर वर्तमान में प्रश्न चिन्ह लगा है और फिलहाल बैंक के लोअर मैनेजमेंट, शेयरधारकों, सहकारी समितियों और ग्राहकों के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही ही अत्यंत महत्वपूर्ण कदम होगा।
क्या उच्चतर प्रबंधन पारदर्शिता और जवाबदेही पूर्ण कार्य कर रहा है यह एक यक्ष प्रश्न है? छत्तीसगढ़ के नागरिकों सहित तमाम ग्राहकों, सहकारी समितियों को वर्ष भर में बैंक के कामकाज के बारे में सवाल पूछने और मैनेजमेंट को जवाबदेह ठहराने का यही एक मौका है वार्षिक आम बैठक। इस बैठक में वित्तीय रिपोर्टों की समीक्षा की जायेगी, साथ ही लाभांश को मंजूरी दी जाएगी और बोर्ड के नये सदस्यों का चुनाव भी किया जायेगा।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि केदार गुप्ता के बतौर प्राधिकृत अधिकारी और चेयरमैन के रूप में यह उनकी पहली एक.जी.एम. है। पूर्ववर्तीयो के इतर केदार गुप्ता ना सिर्फ एक तेज तर्रार नेता हैं बल्कि वो राजधानी के एक धरती पुत्र भी है जो ना सिर्फ कांग्रेस की जोगी सरकार के समय से और पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के खिलाफ ज़मीनी लड़ाई लड़ते आये है। वो ना सिर्फ भाजपा के प्रमुख प्रवक्ता रहे हैं बल्कि किसानों के दर्द से भी भली भांति परिचित हैं।
वो भाजपा के उन नेताओं में भी शामिल हैं जो सहकारिता के महत्व को भी बखूबी जानते हैं। 2023 में भाजपा की राज्य सरकार किसानों और धान के समर्थन मूल्य की वजह से आज सत्तारुढ़ है।
राजधानी के राजनैतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि आज केदार गुप्ता के नेतृत्व में बैंक की यह वार्षिक बैठक कुछ बड़े निर्णय ले कर आये।