पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक )
छत्तीसगढ़/रायपुर. छत्तीसगढ़ में अपेक्स सहित सहकारी बैंक ही ग्रामीण क्षेत्रों में बैकिंग व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संपूर्ण धान खरीदी सहित खाद बीज की पूरी व्यवस्था इन्हीं के माध्यम से की जाती है। क्योंकि प्रदेश कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर है इससे इनके महत्व को समझा जा सकता है। पंरतु ये सहकारी बैंक वित्तीय घोटाले और आर्थिक अनियमितता के गढ़ बनते जा रहे हैं। धान खरीदी में तो किसानों को भुगतान के लिए सीधे तौर पर नक़द राशि की मांग शाखाओं में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा की जाती है। नहीं देने पर किसानों और आम खाताधारकों को प्रताड़ित किया जाता है।
ताज़ा मामला अपेक्स बैंक का है। रायगढ़ जिले में जिला सहकारी बैंक का लाईसेंस निरस्त होने के बाद वहां की लैलूंगा, सारंगढ़, पुसौर, बरमकेला, पत्थलगांव आदि शाखाओं का संचालन अपेक्स बैंक द्वारा किया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 4 एवं 5 नवंबर को करोड़ों रुपयों के संदिग्ध ट्रांजेक्शन किये गये। जिसकी जानकारी मुख्यालय को प्राप्त होने पर तत्काल प्रारंभिक जांच की गई जिसमें प्रथम दृष्टया आर्थिक अनियमितता और कदाचार पाया गया। 8 नवंबर को देर रात अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक के. एन. कांडे द्वारा शाखा प्रबंधक डी.आर. बाघमारे, लेखाधिकारी सुश्री मिनाक्षी मांझी और लिपिक आशीष पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित की शाखा बरमकेला में डीएमआर खातों में नियम विपरीत एवं संदिग्ध ट्रांजेक्शन व नकद आहरण करने और समितियों के केसीसी खातों को अनाधिकृत रूप से नामे कर IMPS ट्रांजेक्शन कर राशि का अंतरण कर गबन किया गया है।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि निलंबन पूर्व ही प्रारंभिक जांच में ही यह राशि करोड़ों रुपयों में होगी इस लिए राशि का उल्लेख नहीं है। दूसरी बात यह है कि निलंबन आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि अनुपस्थित लेखाधिकारी की आई.डी. का उपयोग कर सुनियोजित तरीके से नियमित गबन कराया जाना पाया गया है। इससे यह स्पष्ट तौर पर प्रदर्शित होता है कि लेखाधिकारी शाखा में कार्यालयीन ,अवकाश या अन्य वजहों से शाखा में उपस्थित नहीं थी और लिपिक द्वारा की गई एन्ट्री और ट्रांजेक्शन आदि को शाखा प्रबंधक द्वारा ही लेखाधिकारी और अपनी आईडी पासवर्ड के माध्यम से पास कर राशि आहरण और वित्तीय अनियमितता कदाचार सहित आर्थिक अपराध को अंजाम दिया गया। चूंकि बैंकिंग सिस्टम में पूरी व्यवस्था ही बड़ी चाक-चौबंद रहतीं हैं और इसमें सेंधमारी के आसार बहुत ही कम होते हैं वो भी जब तक बैंकिंग सिस्टम में बैठा व्यक्ति इसको अंजाम ना दे तब तक हेरफेर संभव ही नहीं है। मतलब दबाव बना कर शाखा प्रबंधक ने लेखाधिकारी से आई डी और पासवर्ड ले लिया और पूरी घटना को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया।
इसमें एक बड़ी बात और सामने निकल कर आई की अपेक्स बैंक द्वारा पिछले कुछ समय से बैक आफिस स्टाफ और सिक्योरिटी गार्ड्स की नियुक्ति आउटसोर्सिंग द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में CDO Security Services के पास इसका ठेका है। जो पूरे प्रदेश की 15 से अधिक ब्रांच और हेड आफिस में 75 से ज्यादा कर्मचारियों को नियुक्ति के लिए जिम्मेदार है। इससे पहले ABR कंपनी के पास इसका ठेका था कुछ सालों पूर्व GST फ्राड की वजह से इस कंपनी को हटा दिया गया था। बैंक से GST कलेक्शन तो किया पंरतु सरकार को इसका भुगतान नहीं किया। और मिली जानकारी के अनुसार एल.2 के रूप में दर्ज CDO को आउटसोर्सिंग का ठेका दे दिया गया। इस कंपनी ने कोई भी नई नियुक्ति ना करते हुए पूर्ववर्ती कंपनी के नियुक्त कर्मचारियों को ही आगे कंटिन्यू कर दिया। नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी परमार द्वारा अपनी आडिट रिपोर्ट में आऊटसोर्सिंग कर्मचारियों के वित्तीय कार्यों में संलिप्तता पर घोर आपत्ति की थी। और अपनी सालाना की आडिट रिपोर्ट में आऊटसोर्सिंग कर्मचारियों को वित्तीय कार्यों से हटाने का स्पष्ट उल्लेख किया था। पंरतु आज भी अपेक्स बैंक द्वारा आऊटसोर्सिंग के कर्मचारियों को वित्त और आर्थिक कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। आऊटसोर्सिंग कर्मचारियों में सुपरवाइजर,कम्प्यूटर आपरेटर,डाटा एंट्री ऑपरेटर और गार्डों की नियुक्ति की गई थी। इनकी काफी शिकायतें आती रहती है। जिसकी वजह से इन में से कुछ कर्मचारियों को रायगढ़ जिले की कुछ शाखाओं से बर्खास्त भी किया जा चुका है।
इस पूरे मामले में प्रबंध संचालक के.एन.कांडे से संपर्क किया गया उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
डी.जी.एम. भूपेश चंद्रवंशी ने बताया की कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थी कि बैंक के एकाउंट को मेनु प्लेट करके बड़ी राशि का हेरफेर किया गया है। प्रारंभिक जांच में 50 लाख रुपए से ज्यादा की राशि का हेरफेर प्रथम दृष्टया दिख रही है। इसकी विस्तृत जांच बैंक की आई टी शाखा द्वारा की जायेगी। वहीं CDO प्रबंधक द्विवेदी ने बताया कि हम आउटसोर्सिंग में कर्मचारी उपलब्ध कराते हैं। जिनका उपयोग गैर वित्तीय कार्यों में होता है। यदि बैंक उनका उपयोग वित्तीय कार्यों में कर रहा है तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है। शिकायत आने पर हम कड़ी कार्यवाही करते हैं।
इस पूरे मामले में शाखा प्रबंधक, लेखाधिकारी और लिपिक से फोन में संपर्क किया गया उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।