डोंगरगढ़ (छग)। ऐतिहासिक मां बम्लेश्वरी मंदिर में शुक्रवार देर रात आस्था और प्रबंधन के बीच बड़ा टकराव हो गया। क्वांर नवरात्र की पंचमी पर हजारों की संख्या में गोंड आदिवासी समाज के लोग अंगा देव के साथ परंपरागत भेंट चढ़ाने मंदिर पहुंचे।
समाज के लोग निचले बम्लेश्वरी मंदिर में बकरे लेकर बलि की अर्जी लगाने पहुंचे और पुजारियों व बैगाओं संग गर्भगृह में प्रवेश करने लगे। मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि गर्भगृह में केवल धोतीधारी पुजारियों को अनुमति है। इसी बात पर विवाद बढ़ा और समाज के लोगों ने गर्भगृह का ताला तोड़ने की कोशिश की। कुछ लोग अंगा देव को लेकर दान पेटी पर चढ़ गए और आदिवासी रीति-रिवाज से पूजा कर दी। इसी दौरान मां बम्लेश्वरी का मुकुट हिलने की खबर सामने आई, जिससे माहौल और गरमा गया।
तनाव के बीच खैरागढ़ राजघराने के राजकुमार भवानी बहादुर सिंह को पूजा करने की अनुमति दी गई। सिंह ने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट परंपरा की अनदेखी कर रहा है और गोंड समाज की आस्था को ठेस पहुंचा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गोंड समाज को उसका हक नहीं मिला, तो वे खुद अधिकार लेने को मजबूर होंगे।
अगले दिन शनिवार को मंदिर ट्रस्ट की आपात बैठक बुलाई गई। अध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा— “मंदिर सबका है, लेकिन जबरन गर्भगृह में घुसना गलत है।” उन्होंने इस घटना की लिखित शिकायत पुलिस से करने की बात कही।
डोंगरगढ़ थाने में दर्ज शिकायत में भवानी बहादुर सिंह और लाल विक्रम सिंह पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने जबरन गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा सामग्री और मुकुट को अव्यवस्थित किया, जिससे सनातन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
अब यह मामला तूल पकड़ चुका है। गोंड समाज ने साफ कहा है कि उनकी परंपरा और पूजा-अधिकार को मान्यता मिलनी चाहिए। वहीं, ट्रस्ट और राजघराना आमने-सामने हैं।