रायपुर : छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी के सदस्य पश्चिम बंगाल में व्याप्त कानून व्यवस्था की भयावह स्थिति एवं हिंदू नरसंहार से अत्यंत व्यथित हैं। पश्चिम बंगाल में हाल की घटनाएं कानून और व्यवस्था की पूर्ण विफलता को दर्शाते हैं। वर्तमान में जारी व्यापक दंगे, हिंदू समुदाय के खिलाफ व्यवस्थित हमले और हिंसा , बड़ी संख्या में हिंदुओं का पलायन और राज्य प्रशासन की संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने तथा सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता शामिल है।
विचारणीय है कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था के साथ साथ संवैधानिक अनियमितता इस कदर दुर्भर हो चुकी है कि वहां की ममता बनर्जी सरकार द्वारा माननीय राज्यपाल जी को भी दंगा ग्रस्त क्षेत्र मुर्शिदाबाद का दौरा करने में अड़चनें डालाजा रहा है तथा उनको क्षेत्र का अवलोकन नही करने दिया जा रहा है। अतः आपके द्वारा भारत के संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने कहा कि हमें विश्वास है कि वहां राष्ट्रपति शासन लगाना आवश्यक है ताकि भविष्य में जान-माल की हानि को रोका जा सके, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जा सके, और राज्य में लोकतांत्रिक और संवैधानिक शासन को बहाल किया जा सके। हम आपसे तत्काल उचित कार्रवाई की मांग करते हैं ताकि न्याय, शांति और संवैधानिक व्यवस्था पुनर्स्थापित हो सके।
मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ कानून में संशोधन के खिलाफ हुई हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो गई। वक्फ कानून में संशोधन के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन ने उग्र रूप लिया और फिर हिंसा ने ऐसा तांडव मचाया कि बाप-बेटे की सरेआम हत्या कर दी गई। एक अन्य की बात में मौत हुई। अहम ये कि इस हिंसा में सिर्फ एक कानून का विरोध करने के नाम पर हिंदुओं की दुकानें लूट ली गईं। घरों को निशाना बनाया गया और लोगों को भी टारगेट किया गया।
बीजेपी नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी एक पोस्ट में लिखते हैं कि धार्मिक कट्टरपंथियों के डर से मुर्शिदाबाद के धुलियान में 400 से अधिक हिंदू नदी पार करके मालदा के बैष्णबनगर के देवनापुर-सोवापुर जीपी के पार लालपुर हाई स्कूल में शरण लेने के लिए मजबूर हुए हैं। धुलियान से 400 से अधिक हिंदू परिवार डर के साए में अपना सब कुछ छोड़कर निकल चुके हैं। सुवेंदु अधिकारी अधिकारी ने कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनके कथित तौर पर हिंदू दूसरी तरह जाकर शरण ले रहे हैं।