नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ राजनेता सत्यपाल मलिक का मंगलवार दोपहर निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनका निधन नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हुआ, जहां वे उपचाराधीन थे।
मलिक एक लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और उन्होंने विभिन्न संवैधानिक पदों पर रहते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णयों में भूमिका निभाई। अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक, वे जम्मू-कश्मीर के अंतिम पूर्ण राज्यपाल रहे। उनके कार्यकाल के दौरान ही 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किया गया।
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर 1968-69 में छात्र संघ अध्यक्ष बनने से शुरू हुआ। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव से थे और जाट समुदाय से आते थे। उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी की डिग्रियाँ प्राप्त की थीं।
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बार बेबाक टिप्पणियाँ कीं, विशेषकर किसानों के मुद्दों और भ्रष्टाचार के खिलाफ। यही कारण है कि उन्हें एक 'बेखौफ और स्पष्टवक्ता' के रूप में भी जाना गया।
पूर्व राज्यपाल मलिक के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“बेखौफ आवाज़ आज शांत हो गई। सत्यपाल मलिक जी ने हमेशा सत्य और किसान हित की बात कही। ईश्वर उन्हें शांति दे।”
कांग्रेस, भाजपा, और अन्य प्रमुख दलों के नेताओं ने भी उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
मलिक के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए बुधवार को उनके पैतृक गांव हिसावदा (बागपत) लाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो पुत्र और एक पुत्री हैं।