Hindenburg Research : हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने भारत में फिर खलबली मचा दी है। इसे लेकर कांग्रेस केंद्र सरकार पर हमलावर हो गई है। राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि जनवरी 2023 की हिंडनबर्ग रिपोर्ट के खुलासे के बाद सेबी ने पहले PM मोदी के करीबी सहयोगी अडानी को सुप्रीम कोर्ट में क्लीन चिट दे दी थी। हालांकि सेबी प्रमुख से जुड़े एक लेन-देन के बारे में नए आरोप सामने आए हैं। मध्यम वर्ग से संबंधित छोटे और मध्यम निवेशक जो अपनी मेहनत की कमाई शेयर बाजार में लगाते हैं, उन्हें सुरक्षा की जरूरत है, क्योंकि वे सेबी पर भरोसा करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस बड़े घोटाले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की जांच जरूरी है। तब तक चिंता बनी हुई है कि PM मोदी अपने सहयोगी को बचाते रहेंगे, जिससे भारत की संवैधानिक संस्थाओं से समझौता होगा, जिन्हें सात दशकों में कड़ी मेहनत से बनाया गया है। अडानी महाघोटाले की जांच SEBI को दी गई। अब खबर है कि SEBI की चीफ माधवी बुच भी अडानी महाघोटाले में शामिल हैं। मतलब घोटाले की जांच करने वाला ही घोटाले में शामिल है। है ना कमाल की बात। साफ है नरेंद्र मोदी ने जांच के नाम पर अपने ‘परम मित्र’ को बचाने की साजिश रची है। इस महाघोटाले की सही जांच सिर्फ JPC से हो सकती है, लेकिन मोदी सरकार JPC बनाने को तैयार नहीं है। नरेंद्र मोदी कब तक अडानी को बचा पाएंगे, एक न एक दिन तो पकड़े जाएंगे।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने साधा निशाना
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि ये जो सारा मामला है, जो पहली रिपोर्ट भी उन्होंने प्रकाशित की थी, उसकी एक संयुक्त संसदीय समिति से जांच होनी चाहिए, जो संस्थाएं हैं उनकी विश्वसनीयता को कायम रखने के लिए ये अत्यंत आवश्यक है। इसकी पूरी तरह से निष्पक्ष जांच करवाकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि ये गंभीर मामले हैं। मुझे इनके विवरण की जानकारी नहीं है। ऐसे किसी भी आरोप का संतोषजनक उत्तर दिया जाना चाहिए या इसकी जांच होनी चाहिए। इन बातों को यहीं लटका कर नहीं छोड़ा जा सकता और न ही हमारी व्यवस्था की अखंडता पर संदेह किया जा सकता है। यह महत्वपूर्ण है कि या तो आरोपी लोगों द्वारा संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया जाए या फिर जांच होनी चाहिए।
दूध का दूध पानी का पानी अपने आप हो गया: खेड़ा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि दूध का दूध पानी का पानी अपने आप हो गया। भारत सरकार ने कोई विशेष जांच की तरफ ध्यान नहीं दिया था। हिंडनबर्ग ने ही एक और रिपोर्ट निकाली जिसमें इनका सारे कारनामे सबके सामने आ गए। ऑफशोर कंपनी में उनके निवेश सामने आ गए। जब सबकुछ सामने है तो सवाल उठता है कि माधवी बुच को जब SEBI का प्रमुख बनाया था तब क्या भारत सरकार को ये जानकारी नहीं थी? अगर नहीं थी तो ये बहुत बड़ी विफलता है। राहुल गांधी ने कहा था चौकीदार चोर है, वो साबित हो गया। कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने भी निशाना साधा है।