नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र में सोमवार को लोकसभा का माहौल बेहद गर्म रहा। ऑपरेशन सिंदूर पर चली करीब 16 घंटे की विशेष बहस के दौरान जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन की सफलता पर सरकार का पक्ष रखा, वहीं AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
ओवैसी ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट संबंधों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब दोनों देशों के बीच व्यापार बंद है, कूटनीतिक रिश्ते तनावपूर्ण हैं और आतंकवाद चरम पर है, तो भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच की अनुमति कैसे दी जा रही है?
"मेरा ज़मीर गवारा नहीं करता कि मैं भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट मैच देखूं," - असदुद्दीन ओवैसी
लोकसभा में ओवैसी ने पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में साढ़े सात लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, फिर भी कुछ आतंकी राज्य में घुसकर हमला कर देते हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया तंत्र की विफलता है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
"चार आतंकवादी आकर हमारे लोगों की जान ले लेते हैं, तो यह सुरक्षा प्रणाली की नाकामी है। अगर उपराज्यपाल या पुलिस की जवाबदेही है तो उन्हें हटाया जाना चाहिए।"
AIMIM सांसद ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भी वहां जारी आतंकी गतिविधियों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बावजूद आतंकवाद खत्म नहीं हुआ।
"सरकार की नीतियाँ नाकाम हो रही हैं। पाकिस्तान एक असफल देश है, यह सब जानते हैं – लेकिन हमें अपनी विफलताओं से आँखें नहीं मूँदनी चाहिए।"
ओवैसी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संघर्ष विराम की घोषणा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि भारत जैसे संप्रभु देश के लिए यह स्थिति चिंताजनक है।
"क्या भारतीय सशस्त्र बल अमेरिकी घोषणा का पालन करेंगे? और भारत सरकार ने आज तक इसका खंडन क्यों नहीं किया?"
वहीं बहस में भाग लेते हुए भाकपा-माले (लिबरेशन) के सांसद राजाराम सिंह ने भी सुरक्षा चूक पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहलगाम हमले के वक्त हजारों पर्यटक बेसहारा थे। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से इस्तीफे की मांग की और कहा कि सरकार इस हमले की नैतिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
संसद के इस सत्र में जहां सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को लेकर आत्मविश्वास जताया, वहीं विपक्ष ने आतंकवाद, जवाबदेही, और भारत-पाक संबंधों को लेकर सरकार पर चौतरफा हमले किए। ओवैसी के बयान ने बहस को और तीखा बना दिया है।