नई दिल्ली। डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। अब हर बार OTP मंगाना या मोबाइल नंबर वेरीफाई करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। टेलीकॉम विभाग (DoT) ने मोबाइल नंबर वेलिडेशन (MNV) को लेकर एक नया ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है, जिससे बैंक, फिनटेक कंपनियां और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसका सीधा असर होगा।
सरकार के नए प्रस्ताव के तहत:
इस नियम का ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब परिवारों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा, जो एक ही मोबाइल नंबर से कई सरकारी योजनाओं, बैंक खातों और सेवाओं को ऑपरेट करते हैं।
बार-बार OTP वेरिफिकेशन का खर्च बढ़ने से कंपनियां ग्राहकों से हर अकाउंट के लिए अलग मोबाइल नंबर की मांग कर सकती हैं, जिससे डिजिटल पहुंच और समावेशन (digital inclusion) पर असर पड़ेगा।
यदि किसी मोबाइल नंबर की पहचान संदिग्ध या फर्जी पाई जाती है, तो 90 दिनों तक उस नंबर को बंद किया जा सकता है। इससे KYC प्रक्रिया और डिजिटल सेवाओं की निर्भरता और बढ़ जाएगी।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाना है, लेकिन इससे कम आय वर्ग के लोग और डिजिटल डिवाइड से जूझ रहे समुदाय अधिक प्रभावित हो सकते हैं। अगर यह नियम लागू होता है तो सस्ती और सुलभ डिजिटल सेवाओं की पहुंच एक बड़ी चुनौती बन सकती है।