उत्तराखंड के चमोली जिले में हुई इस त्रासदी में आर्थिक तंगी और बार-बार की नाकामियों से त्रस्त एक भाई ने पहले अपनी बहन को जिंदा जलाया और फिर स्वयं खाई में कूदकर अपनी जान दे दी। यह मामला मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक दबाव और आर्थिक संकट की गंभीरता को उजागर करता है।
6 अप्रैल को तपोवन के समीप चाचड़ी गांव के पास एक कार में जली हुई हालत में एक महिला का शव मिला था। कार की स्थिति देखकर पुलिस को मामला संदिग्ध लगा। जली हुई कार के अंदर ड्राइवर सीट के बगल में शव के साथ कुछ आभूषण भी मिले थे, जिससे शव की पहचान महिला के रूप में की गई। कार के पास पाई गई कर्नाटक की रजिस्ट्रेशन प्लेट से पुष्टि हुई कि मृतका श्वेता पदमा सेनापति थी।
पुलिस को जब पता चला कि श्वेता के साथ उसका भाई सुनील सेनापति भी था, लेकिन वह मौके पर नहीं मिला, तो उसकी तलाश शुरू की गई। खोजबीन में श्वान दस्ते की मदद ली गई और कार से करीब 400 मीटर नीचे खाई में उसका शव बरामद किया गया। आईटीबीपी और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की मदद से शव को बाहर निकाला गया।
तफ्तीश के दौरान यह सामने आया कि दोनों भाई-बहन बेंगलुरु से थे। जब पुलिस टीम ने बेंगलुरु जाकर परिजनों से बातचीत की, तो पता चला कि श्वेता और सुनील काफी समय से आर्थिक संकट में थे। अक्सर वे रिश्तेदारों से उधार मांगते रहते थे और कई बार फोन पर कह चुके थे कि वे आत्महत्या करने पर मजबूर हो सकते हैं।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि सुनील लगातार असफलताओं से इस कदर टूट चुका था कि उसने धार्मिक विश्वास भी छोड़ दिया था। न वह मंदिर जाता था, न पूजा-पाठ करता था। इसके विपरीत, उसकी बहन श्वेता काफी धार्मिक प्रवृत्ति की थी और मंदिरों में आस्था रखती थी। 5 अप्रैल की शाम को दोनों भविष्य बद्री मंदिर भी गए थे।
श्वेता और सुनील मूल रूप से ओडिशा के रायगढ़ के रहने वाले थे। करीब 15-16 साल पहले दोनों विशाखापट्टनम शिफ्ट हुए और वहां व्यापार शुरू किया। लेकिन व्यापार में लगातार घाटा होने से आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई। इसके बाद वे बेंगलुरु चले गए। माता-पिता की मृत्यु के बाद हालात और खराब हो गए। फिर भी दोनों भाई-बहन ने कई जगह व्यापारिक प्रयास किए, लेकिन हर जगह असफलता ही हाथ लगी।
ऐसी घटनाएँ समाज के लिए एक चेतावनी हैं कि हमें समय रहते एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों को सुलभ बनाने की आवश्यकता है। स्थानीय प्रशासन और समुदाय को मिलकर ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।