रिपोर्ट, अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला में झोलाछाप डॉक्टरों का मकड़जाल बुरी तरह फैल चुका है, जिससे स्थानीय लोगों की जान पर बन आई है। जहां एक ओर चित्रकूट के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) झोलाछाप डॉक्टरों की गतिविधियों पर कोई सख्ती नहीं दिखा रहे हैं, वहीं सतना जिले में भी जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ढिलाई से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में इन अवैध डॉक्टरों की मौजूदगी से लोग अपनी जिंदगी को दांव पर लगाने को मजबूर हैं।
खासकर, चित्रकूट के शिवरामपुर रोड, खोही चौराहा और गुप्तगोदावरी रोड जैसे इलाकों में झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम अपना मेडिकल, क्लीनिक चला रहे हैं। उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के सतना जिले में भी इस बीमारी की नकल साफ देखी जा सकती है। सतना के ग्रामीण इलाकों में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की लापरवाही से कई झोलाछाप डॉक्टर धड़ल्ले से इलाज कर रहे हैं।
गांवों के मोहल्लों में इन झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक हर गली-नुक्कड़ पर सजते दिख रहे हैं, और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता ने इनकी गतिविधियों को और बढ़ावा दिया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि सीएमओ और जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दोनों ही इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिसके चलते ग्रामीणों को जान का खतरा बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह लापरवाही स्वास्थ्य अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है, जहां झोलाछाप डॉक्टरों को खुली छूट मिल रही है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जनता की शिकायतें अनसुनी हो रही हैं और इलाज के नाम पर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ जारी है।
सतना और चित्रकूट जिला के ग्रामीण इलाकों में इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अगर जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया गया, तो इसका खामियाजा लोगों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ सकता है। झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और चिकित्सा अधिकारियों की जवाबदेही तय करना अब बेहद जरूरी हो गया है।