नई दिल्ली : लोकसभा में एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार विदेशों में रह रहे भारतीयों के सांस्कृतिक, धार्मिक और मानवीय अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
यह बयान लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आया, जिसमें उन्होंने विभिन्न देशों में रह रहे भारतीयों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं पर चिंता व्यक्त की थी और दूतावासों की भूमिका पर जानकारी मांगी थी।
विदेश मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 207 देशों और सभी 7 महाद्वीपों में 3.43 करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी या भारतीय मूल के रूप में बसे हुए हैं।
सबसे अधिक भारतीय निम्नलिखित तीन देशों में हैं:
भारत सरकार के विदेशों में 219 मिशन और केंद्र कार्यरत हैं, जो भारतीय समुदाय के सांस्कृतिक और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। विशेष रूप से संकट के समय PIO (भारतीय मूल के व्यक्ति) और OCI (प्रवासी भारतीय कार्डधारक) को वाणिज्य दूतावास संबंधी सहायता भी दी जाती है।
विदेश मंत्री ने बताया कि प्रवासी भारतीयों को भारत से जोड़ने और उनकी जड़ों को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई पहल शुरू की हैं:
विदेश मंत्री ने कहा कि OCI कार्डधारकों को आजीवन बहु-प्रवेश वीजा, पुलिस पंजीकरण से छूट, और घरेलू हवाई किरायों, स्मारकों और राष्ट्रीय उद्यानों में भारतीय नागरिकों के समान शुल्क जैसे लाभ प्राप्त हैं।
आर्थिक, शैक्षिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में उन्हें NRI के समकक्ष अधिकार प्राप्त हैं, सिवाय कृषि भूमि स्वामित्व जैसे अपवादों के।
भारतीय संस्कृति के प्रचार के लिए सरकार ने विदेशों में अनेक सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किए हैं:
विदेश मंत्री के इस जवाब से स्पष्ट है कि सरकार न केवल प्रवासी भारतीयों की रक्षा व सहायता के लिए सक्रिय है, बल्कि उनके साथ सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को भी प्राथमिकता दे रही है।