August 01, 2025

Malegaon Blast Case : मोहन भागवत को अरेस्ट करने के आदेश थे- रिटायर्ड ATS अफसर का बड़ा खुलासा, बोले- भगवा आतंक की थ्योरी थोपने का दबाव था


नई दिल्ली। 2008 के मालेगांव बम धमाके के मामले में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने गुरुवार को सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद अब इस केस से जुड़े एक रिटायर्ड एटीएस अधिकारी महबूब मुजावर का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने भारी साजिश का दावा किया है।

'मोहन भागवत को अरेस्ट करने का आदेश मिला था'

महबूब मुजावर ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि मालेगांव ब्लास्ट के बाद उन्हें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए थे। उन्होंने कहा, "उस समय के जांच अधिकारी परमबीर सिंह ने मुझे मोहन भागवत को अरेस्ट करने के लिए कहा था।"
मुजावर के अनुसार, यह सब कुछ 'भगवा आतंकवाद' की थ्योरी को साबित करने के लिए किया जा रहा था।

फर्जी चार्जशीट और राजनीतिक दबाव का आरोप

रिटायर्ड इंस्पेक्टर ने बताया कि उन पर मारे गए आरोपियों को चार्जशीट में 'जिंदा' दिखाने का भी दबाव था।
"जब मैंने ऐसा करने से इनकार किया, तो मुझ पर झूठे मुकदमे लाद दिए गए," उन्होंने कहा। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि वह सभी मामलों में बरी हो चुके हैं।

अदालत का फैसला: 'सिर्फ नैरेटिव से दोष सिद्ध नहीं होता'

एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं। जज एके लाहोटी ने लिखा:

  • आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। किसी भी धर्म में हिंसा को स्थान नहीं है।"
  • अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है।"
  • सिर्फ नैरेटिव के आधार पर दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं हो सकता।"
  • इन प्रमुख बिंदुओं पर कोर्ट ने दिया फैसला:
  • आरडीएक्स लाने या बम असेंबल करने के कोई सबूत नहीं मिले।
  • बम धमाके में उपयोग हुई बाइक साध्वी प्रज्ञा की होने के भी प्रमाण नहीं मिले।
  • घटना के बाद किसने पथराव किया, या पुलिसकर्मी की बंदूक किसने छीनी, इसका भी कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।

ये थे आरोपी

  • साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (पूर्व बीजेपी सांसद)
  • लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित
  • सुधाकर चतुर्वेदी
  • रमेश उपाध्याय (रिटायर्ड)
  • एवं अन्य तीन आरोपी

क्या हुआ था मालेगांव में?

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव के भीकू चौक पर एक दोपहिया वाहन में बम विस्फोट हुआ था। इस हमले में 6 लोगों की मौत हुई थी और 101 लोग घायल हुए थे। मृतकों में महिलाएं और स्थानीय नागरिक शामिल थे।



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