नई दिल्ली। 2008 के मालेगांव बम धमाके के मामले में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने गुरुवार को सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद अब इस केस से जुड़े एक रिटायर्ड एटीएस अधिकारी महबूब मुजावर का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने भारी साजिश का दावा किया है।
महबूब मुजावर ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि मालेगांव ब्लास्ट के बाद उन्हें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए थे। उन्होंने कहा, "उस समय के जांच अधिकारी परमबीर सिंह ने मुझे मोहन भागवत को अरेस्ट करने के लिए कहा था।"
मुजावर के अनुसार, यह सब कुछ 'भगवा आतंकवाद' की थ्योरी को साबित करने के लिए किया जा रहा था।
रिटायर्ड इंस्पेक्टर ने बताया कि उन पर मारे गए आरोपियों को चार्जशीट में 'जिंदा' दिखाने का भी दबाव था।
"जब मैंने ऐसा करने से इनकार किया, तो मुझ पर झूठे मुकदमे लाद दिए गए," उन्होंने कहा। हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि वह सभी मामलों में बरी हो चुके हैं।
एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं। जज एके लाहोटी ने लिखा:
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव के भीकू चौक पर एक दोपहिया वाहन में बम विस्फोट हुआ था। इस हमले में 6 लोगों की मौत हुई थी और 101 लोग घायल हुए थे। मृतकों में महिलाएं और स्थानीय नागरिक शामिल थे।