रिपोर्ट,अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय और ब्यंजना आर्ट एंड कल्चर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ जीवन पर्यन्त कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने किया।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में गोस्वामी तुलसीदास सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सामाजिक परिप्रेक्ष्य विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया है। पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास एक महान विद्वान संत है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामायण अवधी भाषा में आज विश्व प्रसिद्ध रामचरितमानस जनमानस के समस्त समस्याओं का समाधान है। उन्होंने अवधी भाषा की महत्ता पर प्रकाश डाला। साथ ही अवधी भाषा को समुच्य भाषा माना है। पद्मश्री विदुषी विधा बिंदु सिंह ने कहा कि अवधी भाषा, लोकलय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान समय में अवधी और भोजपुरी भाषा में भी फिल्म का निर्माण हो रहा है, जो कि एक महत्वपूर्ण योगदान है। कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने जीवन पर्यन्त कुलाधिपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य और उत्तराधिकारी रामचंद्र दास का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ गोपाल मिश्र ने किया।
इस मौके पर डाॅ इला द्विवेदी, डाॅ कल्पना दुबे, दिबया दुबे, वेणु वनिता, डाॅ रामशंकर, विश्वविद्यालय के डीन महेंद्र कुमार उपाध्याय, डाॅ हरिकांत मिश्रा, डाॅ सुशील कुमार, विनोद कुमार मिश्र, डाॅ गुलाब धर, डाॅ निहार मिश्रा, डाॅ ज्योति, डाॅ भविष्या माथुर, डाॅ संध्या पांडेय, डाॅ विशेष दुबे, हिंदी विभाग की अध्यक्ष डाॅ किरण तिवारी, डाॅ शांत चतुर्वेदी, डाॅ दुर्गेश मिश्र, एस पी मिश्रा, सुधीर कुमार आदि मौजूद रहे।