May 05, 2022

सब्जी विक्रेता की बेटी अंकिता नागर बनी जज, रिजल्ट सुनकर मां के छलक पड़े आंसू

अंकिता नागर ने सिविल जज एग्जाम में एससी में 5वां स्थान हासिल किया


इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से अच्छी खबर है। यहां इंदौर में सब्जी बेचने वाले की बेटी अंकिता नागर ने सिविल जज बनकर इतिहास रच दिया है। बुधवार 4 मई 2022 को 25 साल की अंकिता नागर ने यह खुशखबरी सबसे पहले अपनी मां को दी। उस समय मां ठेले पर सब्जी बेच रही थीं। अंकिता रिजल्ट का प्रिंटआउट लेकर मां के पास पहुंची और बोली- मम्मी मैं जज बन गई। रिजल्ट सुनकर अंकिता की मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। अंकिता ने बताया कि रिजल्ट एक हफ्ते पहले ही जारी हो गया था, लेकिन परिवार में मौत हो जाने के कारण सभी इंदौर से बाहर थे। घर में गम का माहौल था। इसलिए किसी को इस बारे में बता नहीं पाई।

अंकिता नागर ने सिविल जज एग्जाम में एससी कोटे में 5वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने बताया कि परिवार में सभी सदस्य सब्जी बेचने का काम करते हैं। पापा सुबह 5 बजे उठकर मंडी चले जाते हैं। मम्मी सुबह 8 बजे सभी के लिए खाना बनाकर पापा के सब्जी के ठेले पर चली जाती हैं, फिर दोनों सब्जी बेचते हैं। बड़ा भाई आकाश रेत मंडी में मजदूरी करता है। छोटी बहन की शादी हो चुकी है।

छोटे से कमरे में रोज 8 घंटे करती थी पढ़ाई

अंकिता ने बताया कि वह प्रतिदिन 8 घंटे पढ़ाई के लिए देती थी। शाम को जब ठेले पर अधिक भीड़ हो जाती तो सब्जी बेचने चली जाती थीं। रात 10 बजे दुकान बंद कर घर आ जाते थे। फिर रात 11 बजे से पढ़ाई करने बैठ जातीं। अंकिता ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए बहुत संघर्ष किया। एक छोटे से कमरे में कम लाइट में घंटों पढ़ाई की। अंकिता ने बताया, मैं तीन साल से सिविल जज की तैयारी कर रही हूं। 2017 में इंदौर के वैष्णव कॉलेज से एलएलबी किया। इसके बाद 2021 में एलएलएम की परीक्षा पास की। 

पिता उधार लेकर कालेज के फीस भरते रहे

अंकिता संघर्ष के दिनों को याद कर बताती है कि पिता उधार लेकर कॉलेज की फीस भरते थे। कॉलेज के बाद लगातार सिविल जज की तैयारी में जुटी रही। दो बार सिलेक्शन नहीं होने के बाद भी माता-पिता हौसला दिलाते रहे। यही कारण है कि आज जैसे ही रिजल्ट मेरे हाथ लगा तो सबसे पहले खुशखबरी ठेले पर जाकर मम्मी को दी। अपने अनुभव साझा करते हुए अंकिता ने कहा कि रिजल्ट में नंबर कम-ज्यादा आते रहते हैं, लेकिन छात्र-छात्राओं को हौसला रखना चाहिए। असफलता मिलने पर नए सिरे से कोशिशें करना चाहिए। भविष्य में जरूर अच्छा रिजल्ट आएगा।

बेटी की सफलता पर पिता की खुशी का ठिकाना नहीं 

अंकिता के पिता अशोक नागर ने बताया अंकिता ने लंबे समय तक संघर्ष किया। हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, ऐसे में अंकिता की पढ़ाई के लिए हमें कई बार रुपए उधार लेना पड़े पर उसकी पढ़ाई नहीं रुकने दी। बेटी अंकिता को मिली सफलता पर पिता आशोक नागर की खुशी का ठिकाना नहीं है। अंकिता की मां लक्ष्मी ने बताया कि बेटी के जज बनने की खबर सुनते ही मेरी आंखों से आंसू छलक पड़े। काफी देर तक आंसू रुके ही नहीं। अंकिता की सफलता से मुहल्ले में खुशी का माहौल है। हर कोई उसे बधाई देने के लिए पहुंच रहा है।


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