रांची। मनी लांडरिंग केस में गिरफ्तार आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल इन दिनों सुर्खियों में हैं। ईडी ने उन्हें 11 मई 2022 को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। भारतीय प्रशासनिक सेवा की 2000 बैच की अधिकारी पूजा सिंघल ने 21 साल की उम्र में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। यूपीएससी में चयन के बाद उन्हें झारखंड कैडर मिला।
मूल रूप से देहरादून की रहने वाली पूजा सिंघल ने झारखंड में कई अहम पदों पर काम किया है। 22 साल के अपने करियर में करीब 19 जगहों पर उनकी पोस्टिंग हो चुकी है। हालांकि जिलों में पोस्टिंग के बाद वह विवादों में घिरती रहीं।
पूजा सिंघल की पहली पोस्टिंग झारखंड के हजारीबाग में सदर अनुमंडल पदाधिकारी के पद पर हुई थी। वह यहां अपने काम की वजह से काफी लोकप्रिय हुई थीं।
शिक्षा परियोजना में पदस्थापना के दौरान भी उनका कार्यकाल काफी अच्छा रहा। उसने बच्चों को दी जाने वाली किताबों के एक गिरोह का भी भंडाफोड़ किया था। उनके नेतृत्व में पहली बार झारखंड में विकलांगों का डेटा एकत्र किया गया था। रिम्स में निदेशक प्रशासन के रूप में उनका कार्य भी प्रशंसनीय था।
श्रीमती सिंघल जब जिलों में उपायुक्त के पद पर तैनात हुईं तो वे विवादों में पडऩे लगीं। खूंटी में जिला उपायुक्त के पद पर पदस्थापन के बाद मनरेगा योजना में 16 करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया। इस मामले में उन पर इंजीनियरों से मिलीभगत का भी आरोप लगा था। इसके बाद उनकी पोस्टिंग वहां से चतरा में की गई।
चतरा में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन पर नियमों के खिलाफ एक एनजीओ को छह करोड़ रुपये देने का आरोप लगा था। यह मामला उस समय तत्कालीन विधायक विनोद सिंह ने सदन में उठाया था। विधानसभा समिति ने भी जांच की थी। चतरा में ही उनकी पोस्टिंग के दौरान आतंकियों ने उन पर हमला किया था। इस वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
श्रीमती सिंघल कृषि विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं। यहां पदस्थापन के दौरान उन पर लगे आरोपों के कारण उन्हें समयबद्ध तरीके से पदोन्नति नहीं मिल सकी। बाद में, उपायुक्त के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, उनके खिलाफ आरोपों की विभागीय जांच की गई। उद्योग विभाग के सचिव एपी सिंह को विभागीय जांच का संचालन अधिकारी बनाया गया है। श्री सिंह ने जांच के बाद क्लीन चिट दे दी थी।
क्लीन चिट मिलने के बाद उन्हें पदोन्नत कर कृषि विभाग का सचिव बनाया गया। वह करीब तीन साल तक कृषि विभाग में रहीं। रघुवर दास की सरकार गिरने के बाद उनकी जगह अबू बकर सिद्दीकी को सचिव बनाया गया। सिंघल खेल, कला, संस्कृति और पर्यटन विभाग में तैनात थीं। वहां से उन्हें फिर से उद्योग और खान सचिव बनाया गया।
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