वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और आगामी चुनावों के प्रमुख दावेदार डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ एक और सख्त व्यापारिक कदम उठाया है। 5 अगस्त को दी गई चेतावनी के 24 घंटे बाद ही उन्होंने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का कार्यकारी आदेश जारी कर दिया। इस फैसले के साथ भारत पर कुल 50% आयात शुल्क लागू हो गया है। ट्रंप ने यह कदम भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखने के विरोध में उठाया है।
क्या कहा ट्रंप ने?
ट्रंप ने बुधवार को नौ धाराओं वाले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। आदेश में कहा गया है कि रूस से तेल खरीदना अमेरिका की विदेश नीति के खिलाफ है और इससे यूक्रेन युद्ध में रूस को आर्थिक सहायता मिल रही है। इसी कारण भारत पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।
ट्रंप ने कहा, “भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा है। वे हमसे बहुत व्यापार करते हैं, लेकिन हमें समान अवसर नहीं देते। अब जबकि वे रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं और उससे मुनाफा कमा रहे हैं, तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।”
टैरिफ कब से लागू होगा?
यह टैरिफ 21 दिनों के भीतर, यानी 27 अगस्त 2025 से लागू होगा। हालांकि, वे वस्तुएं जो इस तिथि से पहले अमेरिका के लिए रवाना हो चुकी होंगी और 17 सितंबर 2025 से पहले अमेरिका पहुंच जाएंगी, उन्हें इस शुल्क से छूट दी जाएगी।
किन वस्तुओं पर लगेगा शुल्क?
यह टैरिफ सभी भारतीय निर्यात वस्तुओं पर लागू होगा और यह शुल्क अन्य सभी टैक्स और सेस के अतिरिक्त होगा। कुछ विशिष्ट वस्तुओं और परिस्थितियों में छूट संभव है, जिनका निर्णय अमेरिका के वाणिज्य और विदेश मंत्रालय द्वारा लिया जाएगा।
भारत की प्रतिक्रिया: "हम राष्ट्रीय हित में तेल खरीदते रहेंगे"
ट्रंप के बयान और आदेश के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने दो टूक जवाब दिया। मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी जनता को सस्ता ईंधन देने के लिए रूस से तेल खरीद रहा है और यह पूरी तरह से राष्ट्रीय हित से जुड़ा फैसला है।
भारत ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका और यूरोप खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यूरोपीय यूनियन ने 2024 में रूस से 16.5 मिलियन टन LNG खरीदा, जबकि अमेरिका अब भी रूस से यूरेनियम, पैलेडियम और खाद जैसे उत्पाद आयात कर रहा है।
“भारत पर लगाए जा रहे आरोप नाजायज और अनुचित हैं। हमारी विदेश नीति स्वतंत्र है और जो भी हमारे हितों के अनुरूप होगा, हम वही करेंगे।”
व्यापक असर और रणनीतिक संकेत
ट्रंप ने अपने आदेश में संकेत दिया है कि यदि अन्य देश भी रूस से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से तेल खरीदते पाए गए, तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। आदेश में कहा गया है कि यदि रूस अपनी नीतियों में बदलाव करता है या अमेरिका की विदेश नीति के अनुरूप कदम उठाता है, तो टैरिफ में संशोधन संभव है।
निष्कर्ष
अमेरिका के इस कड़े कदम से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। जबकि ट्रंप इसे "न्यायसंगत दबाव" बता रहे हैं, भारत इसे आर्थिक अनुचित हस्तक्षेप मान रहा है। आने वाले दिनों में इस फैसले का असर भारत के निर्यात उद्योग, ऊर्जा नीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी साफ दिखाई देगा।