काठमांडू। नेपाल के अपदस्थ प्रधानमंत्री और सीपीएनयूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने सत्ता से हटाए जाने के बाद भी भारत के खिलाफ तीखी टिप्पणी की है। सोमवार से शुरू हुए जेन-जेड विरोध प्रदर्शनों के बीच ओली ने एक ओपन लेटर लिखा और इसमें भारत से जुड़े सीमा विवाद—लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा—को प्रमुखता दी।
ओली ने अपने ओपन लेटर में लिखा कि विरोध प्रदर्शनों के पीछे युवा प्रदर्शनकारियों का शोषण कर विध्वंसकारी गतिविधियाँ कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रमुख सरकारी कार्यालयों में आगजनी और तोड़फोड़ अचानक नहीं हुई और बच्चों का इस्तेमाल धोखे की राजनीति के लिए किया गया।
ओली ने अपने संबोधन में लोकतांत्रिक शासन की रक्षा और नेपाल के राष्ट्रीय हितों की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि शिवपुरी में नेपाल सेना के जवानों से घिरे सुरक्षित क्षेत्र में रहते हुए वह युवाओं को याद कर रहे हैं और देश के भविष्य के प्रति चिंता व्यक्त की।
प्रदर्शन और हिंसा:
नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ जेन-जेड आंदोलन भड़क उठा। 24 घंटे के भीतर बढ़ते प्रदर्शन और हिंसा के दबाव में कई मंत्रियों के इस्तीफों के बाद केपी शर्मा ओली को भी पद छोड़ना पड़ा। पुलिस फायरिंग में कम से कम 30 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल सहित कई बड़े नेताओं के निजी घर, संसद, सुप्रीम कोर्ट और मंत्रियों के घरों पर हमला किया। पीएम ओली का निजी आवास भी आक्रमण का शिकार हुआ।
ओली का यह ओपन लेटर और विरोध प्रदर्शनों में उनका रुख दिखाता है कि सत्ता छोड़ने के बावजूद उन्होंने भारत से जुड़े विवादों पर अपनी आवाज़ उठाई और देश के राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया।