प्रकाश के रे
ग़ाज़ा में मारे गए पत्रकारों की बड़ी संख्या को देखना वास्तव में निराशाजनक है, खासकर जब आप विभिन्न संघर्षों की संख्या की तुलना करते हैं.
वियतनाम युद्ध में 20 वर्षों के दौरान 63 पत्रकारों की जान चली गई, जबकि द्वितीय विश्व युद्ध में 7 वर्षों में 67 पत्रकार मारे गए. ग़ाज़ा में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहाँ केवल कुछ महीनों में 90 पत्रकार मारे गए हैं.
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इन बहादुर व्यक्तियों की हानि न केवल उनके प्रियजनों को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे विश्व पर भी गहरा प्रभाव डालती है. उनके समर्पण और साहस के बिना हम युद्ध और संघर्ष की वास्तविकताओं के बारे में अंधेरे में रह जायेंगे.
गौरतलब है कि इजराइल फलस्तीन युद्ध 7 अक्तूबर 2023 से अब तक जारी है. जिसे आज 2 माह, एक सप्ताह और तीन दिन का समय हो चुका है.
साभार:- भड़ास न्यूज नेटवर्क