वाशिंगटन: अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज और इस्फहान—पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 जून 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इन हमलों की पुष्टि करते हुए दावा किया कि ईरान की परमाणु संवर्धन सुविधाएं "पूरी तरह से नष्ट" हो गई हैं। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना और दुनिया के सबसे बड़े आतंक प्रायोजक देश से परमाणु खतरे को रोकना था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स और 30,000 पाउंड के "बंकर बस्टर" बम (GBU-57 मासिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर) का इस्तेमाल किया, जो विशेष रूप से फोर्डो जैसे गहरे भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के सबमरीनों ने 30 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें दागीं। ट्रंप ने कहा कि सभी विमान सुरक्षित रूप से वापस लौट आए हैं।
व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह शांति की दिशा में कदम नहीं उठाता, तो "आगे के हमले और भी बड़े और आसान होंगे।" उन्होंने कहा, "ईरान, मध्य पूर्व का धमकाने वाला देश, अब शांति बनाए।" ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर काम करने की बात भी कही, जिन्होंने इन हमलों को "इतिहास बदलने वाला" करार दिया।
ईरान की परमाणु ऊर्जा संगठन ने हमलों की पुष्टि की, लेकिन दावा किया कि उनकी परमाणु सुविधाएं पहले ही खाली कर दी गई थीं और उनका काम रुकेगा नहीं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई और विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध की आशंका बढ़ गई है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर हमले सफल रहे, तो ईरान की परमाणु क्षमता को वर्षों या दशकों पीछे धकेला जा सकता है। हालांकि, ईरान के असममित जवाबी हमलों, जैसे आतंकवादी गतिविधियों या क्षेत्रीय ऊर्जा सुविधाओं पर हमले, से मध्य पूर्व में व्यापक अस्थिरता का खतरा है।