June 25, 2025

स्वयंभू ट्रस्टी बन अजय तिवारी और महेंद्र अग्रवाल मंदिर ट्रस्ट की भूमियों को अवैधानिक रूप से विक्रय कर आर्थिक अनियमितता कर रहे हैं- महंत राम आशीष दास ( पार्ट -1)

मंहत राम आशीष दास ने लगाये गंभीर आरोप - मंदिर ट्रस्ट की भूमियों के प्रबंधक (कलेक्टर) एवं पंजीयक, सार्वजनिक न्यास से बगैर अनुमति विक्रय - गबन, जालसाजी, कूटरचना, आर्थिक अपराध एवं हिन्दू धर्माविलंबियों की आस्था के साथ खिलवाड़ हैं


रायपुर : जैतूसाव मठ के महंत राम आशीष दास ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि श्री रामचन्द्र स्वामी जैतुसाव मठ के तथाकथित सचिव महेन्द्र अग्रवाल द्वारा रायपुर संभाग आयुक्त के पारित आदेश दिनांक 10/06/2025 को मनमाने रूप से व्याख्या करते हुए प्रेस नोट जारी कर मीडिया को गुमराह करते हुए समाचार प्रकाशित कराया है।


जारी प्रेस नोट में कहा गया कि कलेक्टर कार्यालय एवं रिकार्ड रूम में कार्य करने वाले कर्मचारीयों के साथ मिलीभगत कर जैतुसाव मठ के दस्तावेजो में छेड़छाड़ कर कूटरचना किया गया है। कलेक्टर, रायपुर सहित रिकार्ड रूम में कार्य करने वाले कर्मचारीयों को बदनाम करने एवं मेरी छवि धूमिल करने के लिए प्रेस नोट जारी कर मनमाने रूप से निराधार आरोप लगाये गये एवं दैनिक समाचार पत्रो में समाचार प्रकाशित कराया गया है। रायपुर संभाग आयुक्त श्री महादेव कांवरे के कार्यालय एवं जिला जनसंपर्क कार्यालय से जारी प्रेस नोट को अपने स्वार्थवश और अपने कुकर्मों को छुपाने के लिए मनगढ़ंत रूप से व्याख्या की गई है जो कि एक एक अपराधिक कृत्य है।


स्वयंभू ट्रस्टी एवं सचिव महेन्द्र कुमार अग्रवाल अपने आप को इस ट्रस्ट जैतुसाव मठ से वर्ष 1983 से ट्रस्टी और वर्ष 1984 से अपने आप को ट्रस्ट का सचिव बताते है। जब महेन्द्र कुमार अग्रवाल खुद ही वर्ष 1984 से सचिव है तो जैतुसाव मठ, गोपीदास मंदिर, हनुमार मंदिर, बिरंचीनारायण मंदिर के ग्राम धरमपुरा, सेजबहार व अन्य ग्रामों की भूमि वर्ष 1987 से वर्ष 2007 तक और वर्तमान 2025 में बिना सचिव की जानकारी के कैसे बेची गई। और ट्रस्ट भूमि विक्रय से प्राप्त करोड़ रूपय किनके द्वारा गबन कर लिया गया है।


महेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा किसी भी सक्षम न्यायालय में आज दिनांक तक इसकी शिकायत नही किया जाना इन सब कूटरचनाओं में स्वयं इनके शामिल होने का प्रमाण प्रस्तुत करता है। वर्ष 1984 से सचिव के रूप में महेन्द्र कुमार अग्रवाल ट्रस्टो को संचालित कर रहे है और 45 वर्षों से ट्रस्टो की भूमि अवैध रूप से बेची जा रही है परन्तु इनके द्वारा कोई भी वैधानिक कार्यवाही नही करना ये प्रदर्शित करता है कि इस पूरे खेल में ये भी शामिल रहे है।


लगभग 200 एकड़ न्यास भूमि सभी मठ मंदिरों को मिलाकर जो स्व. महंत लक्ष्मीनारायण दास के नाम पर ग्राम धरमपुरा, सेजबहार में दर्ज थी एवं जिनके प्रबंधक कलेक्टर रायपुर है। लगभग 45 वर्षों से ट्रस्टो की भूमि का विक्रय किया जाना महेन्द्र अग्रवाल के खुद शामिल होने का प्रमाण प्रस्तुत करता है एवं ट्रस्ट में हो रहे आर्थिक अपराध को स्वयं प्रकट करता है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि, व्यवस्था पत्र वर्ष 1972 के अनुसार स्व. महंत लक्ष्मीनारायण दास के नाम पर दर्ज भूमि उनके देहांत हो जाने के बाद ट्रस्ट की हो जायेगी ऐसा दस्तावेज महेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा बताया जाता है। स्व. महंत लक्ष्मीनारायण दास का देहांत 15/03/1987 को हो चुका है।

ट्रस्ट व्यवस्था पत्र वर्ष 1972 के अनुसार स्व. महंत लक्ष्मीनारायण दास के नाम पर दर्ज भूमि ट्रस्ट की हो जायेगी तब वर्ष 1987 से वर्ष 2007 एवं आज वर्ष 2025 तक ट्रस्ट की 200 एकड़ से ज्यादा न्यास भूमि ग्राम धरमपुरा, सेजबहार, दतरेंगा में अवैध रूप से बिना प्रबंधक कलेक्टर और पंजीयक, न्यास रायपुर से अनुमति प्राप्त किये बगैर विक्रय किया जाना और कई न्यास भूमि को तो 10 रू. के स्टाम्प में लिखकर बिना विक्रय पंजीयन कराये अन्य लोगो के नाम पर दर्ज करा दिया गया है। पर महेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा कोई कार्यवाही नही किया जाना और ऐसे अवैध विक्रय नामांतरण को समझौतानामा बनाकर वैध बताने का प्रयास किया जाना महेन्द्र अग्रवाल की इन सब कूटरचनाओं में शामिल होना प्रदर्शित करता है। 



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