चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने ली याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका की स्थिति, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि पहले ही हो गई गिरफ्तारी
पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर/बिलासपुर : भारत माला प्रोजेक्ट घोटाले में अभियुक्त और न्यायिक अभिरक्षा में जेल निरुद्ध उमा तिवारी की एफआईआर रद्द करने की याचिका में आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डबल बेंच विद्वान न्यायाधीश चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और विभु दत्ता गुरु की खंडपीठ में सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता के ओर से अधिवक्ता सरफराज खान ने यह दलील दी कि जिस रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है उस रिपोर्ट के निष्कर्ष में जांच अधिकारी द्वारा यह टिप्पणी दी गई थी की यदि मुआवजा राशि के आवार्ड में कहीं त्रुटि है या मुआवजा संबंधी विवाद उत्पन्न होता है या राशि भुगतान में कोई अनियमितता है, तो उसका निराकरण शासन द्वारा नियुक्त आर्बिटेटर द्वारा किया जायेगा, जो कि इस मामले में आयुक्त, रायपुर संभाग है। इस पूरे प्रकरण की सुनवाई इनके द्वारा की जाती। पंरतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जा कर निर्णय लिया गया है जो उचित नहीं है। फिर भी इस मामले में एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार किया गया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और गिरफ्तार किया गया है उसमें कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हो रहें हैं और न्यायालय तहसीलदार से राजस्व मंडल तक सभी न्यायालयों में, सभी निर्णय उमा तिवारी के पक्ष में आयें है। न्यायिक आदेश से मुआवजा राशि भुगतान किया गया है और इस न्यायिक आदेश को अभी तक कहीं चुनौती नहीं दी गई है तो उमा तिवारी फर्जी कैसे हो गई और यदि उमा तिवारी फर्जी है तो यह पूरा मामला सिविल न्यायालय में लंबित है तब इस मामले में की गई गिरफ्तारी उचित नहीं है और दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। इस सभी दलीलों को विद्वान न्यायाधीशों ने स्वीकार किया सभी दलीलों को सुनने के बाद विद्वान न्यायाधीश ने अंतरिम राहत की पेशकश की गई तो याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया की उमा तिवारी वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में जेल निरुद्ध है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं न्यायधीश विभु दत्ता गुरु द्वारा यह भी जानकारी ली गई की जमानत याचिका की क्या स्थिति है। अधिवक्ता द्वारा बताया गया कि ट्रायल कोर्ट से याचिका खारिज हो गई है एवं हाई कोर्ट में लंबित है।इस पर विद्वान न्यायाधीश ने जमानत याचिका जल्द निराकरण की बात कही।
इस प्रकरण में शिकायतकर्ता वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा और महेंद्र अग्रवाल को नोटिस जारी करने का आदेश चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने दिया है कि किस आधार पर इन्होंने शिकायत की है। साथ ही इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ शासन एवं ईओडब्ल्यू को एक सप्ताह के अंदर जवाब प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया गया है।
इस पूरे मामले में कुल 8 मुख्य अभियुक्त हैं जो सभी राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी है। जिनकी गिरफ्तारी आज तक ईओडब्ल्यू नहीं कर पाई है। हाल ही में ईओडब्ल्यू ने विशेष न्यायालय से इनके लिए वारंट जारी करवाया है और 29 जुलाई की अंतिम तिथि तय कराईं है। यदि आरोपी इस दिन न्यायालय में उपस्थित नहीं होते हैं तो संपत्ति कुर्क करने की कार्यवाही शुरू की जायेगी।