पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जिसे ईओडब्ल्यू के नाम से भी जाना जाता है क्या वास्तव में जांच की दिशा से भटक गई है ? राज्य हो या राजधानी का हर पढ़ा-लिखा व्यक्ति और जो पुलिसिया कार्यवाही और उनके अंदाज से परिचित हैं वो इसे माननें को तैयार नहीं है। लोक संस्कृति में एक कहावत है "बाल की खाल निकालना"। पुलिसिया अंदाज होता है बाल की खाल निकालने जैसा, पंरतु इस पूरे मामले में वो कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। इसका मतलब है कि ईओडब्ल्यू किसी के इशारों में काम कर रही है ? हमने पिछले तीन अंकों में विस्तारपूर्वक बताया कि भारत माला प्रोजेक्ट घोटाला और की गई गिरफ्तारी का यह पूरा मामला क्या है। अगले अंकों में हम विस्तारपूर्वक निजी भूमि पर किये गये फर्जीवाड़ों को भी उजागर करेंगे।
ईओडब्ल्यू ने दिनांक 23/04/25 को अपराध क्रमांक 30/2025, धारा 467,468,471,420,120बी एवं धारा 7सी के अंतर्गत एक एफआईआर दर्ज की है। ये अपराध जिले के वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों के जांच प्रतिवेदनों पर पंजीबद्ध किया गया है। जांच प्रतिवेदन में पूरे प्रकरण के लगभग सभी आरोपियों के नाम दर्ज है। फिर भी दर्ज एफआईआर में ज्ञात आरोपियों में तात्कालिक एसडीएम निर्भय साहू, तात्कालिक तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, तात्कालिक नायाब तहसीलदार लखेश्वर किरण, तात्कालिक राजस्व निरीक्षक रोशन लाल कुर्रे, तात्कालिक पटवारी दिनेश पटेल, जितेन्द्र साहू, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे का नाम दर्ज है। साथ ही अन्य मुआवजा राशि प्राप्त करने वाले अन्य प्राइवेट व्यक्ति लिखा गया है।
पंरतु आज तक इनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पा रही है, जबकि सभी जांच प्रतिवेदन में इनके नाम दर्ज है। जैसे जलसंसाधन विभाग की शासकीय भूमि के फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारी-कर्मचारी दीपक देव, आमीन पटवारी, नरेंद्र नायक और जी.आर.वर्मा सहित मुआवजा राशि पाने वाले कमल नारायण चतुर्वेदानी, ललित चतुर्वेदानी, मुकेश चतुर्वेदानी, ललिता बघेल, मीना बाई, उषा चतुर्वेदानी, मेघराज चतुर्वेदानी, झरना चतुर्वेदानी, टीकमचंद राठी, पुरुषोत्तम, दिनेश टावरी, नंदकिशोर टावरी, सावन टावरी, हेमंत टावरी और लीला देवी टावरी सहित पारस चोपड़ा पर जांच अधिकारी और तात्कालिक अपर कलेक्टर बी.सी.साहू ने स्पष्ट किया है कि इन्होंने 2.34 करोड़ का शासन को चूना लगाया है।
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इसके साथ ही अपने दूसरे जांच प्रतिवेदन में उन्होंने स्पष्ट बताया है कि ग्राम उरला में भूमि स्वामी नरेंद्र पारख की खसरा नं 817/6, 871/20 और 871/42 का भूमि अधिग्रहण कर 1.36 करोड़ रुपए का मुआवजा हृदय लाल गिलहरे को कर दिया गया है। हृदय लाल गिलहरे के नाम की भूमि खसरा नं 871/17 एवं 871/18 में दर्ज है जिसका अधिग्रहण ही नहीं किया गया है।
इससे स्पष्ट है कि भू-अर्जन कर मुआवजा तो दिया गया पंरतु राजस्व अधिकारियों ने फर्जीवाड़ा कर उस व्यक्ति को मुआवजा दिया जो भूस्वामी था ही नहीं। जो व्यक्ति भूस्वामी है ही नहीं उसके बावजूद भी भू-अर्जन की मुआवजा राशि का भुगतान करना गंभीर आर्थिक अनियमिता और अपराध है।
अब फिर से वही प्रश्न जनता और राजनैतिक हलकों में उठ रहा है कि जिन चार लोगों की गिरफ्तारी ईओडब्ल्यू ने की है उनका संबंध रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर में दर्ज अपराध से है क्या ? क्योंकि जिस उगेतरा गांव के मुआवजा प्रकरण में इनकी गिरफ्तारी की गई है वो तो रायपुर-विशाखापत्तनम कारिडोर में है ही नहीं वो गांव आरंग-रायपुर-दुर्ग सिक्सलेन एक्सप्रेस वे स्थित है। तो क्या ईओडब्ल्यू छत्तीसगढ़ में बन रही सभी सड़कों और भारत माला परियोजना में किये गये सभी भूमि अधिग्रहण की जांच कर रही है? या ये गिरफ्तारी राजनैतिक आकाओं के इशारों में की गई है ?
भारत माला प्रोजेक्ट घोटालों पर इनसाइड स्टोरी और एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट - 5( संपूर्ण दस्तावेज़ी साक्ष्यों, साक्षात्कार और ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित)