पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर. छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की एक महात्वाकांक्षी योजना भारत माला परियोजना में रायपुर-विशाखापत्तनम इकानॉमिक कारिडोर सड़क मुआवजा के घोटाले में क्या शक्तिशाली राजनेताओं और अफसरों सहित व्यवसायियों ने जो सैकड़ों करोड़ की बंदरबांट की है उस पर क्या कभी कार्यवाही होगी ? यक्ष प्रश्न है। पिछले पांच अंकों में हमने कुछ तथ्य आप के समक्ष रखें थे, आगे आप पढ़ें भ्रष्ट और शक्तिशालियों की करतूतें।
भारत माला परियोजना की रूपरेखा 2014 में तैयार की जाती है, इसमें छत्तीसगढ़ की भी कुछ सड़कों को लिया जाता है। 31जुलाई 2015 तक रूपरेखा तैयार कर डीपीआर तैयार कर अगस्त 2019 में केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को रायपुर विशाखापत्तनम सड़क निर्माण की स्वीकृति और क्लियरेंस के लिए भेजा जाता है। रिपोर्ट में ग्राम नायकबांधा में प्रस्तावित सड़क मार्ग में शासकीय प्लाट संख्या 17 और रकबा 5.1334 हेक्टेयर और निजी प्लाट संख्या 117 और रकबा 14.8503 हेक्टेयर दर्शाया जाता है। 30 जनवरी 2020 को 3A के पहले प्रकाशन में निजी प्लाट संख्या बढ़ कर 181 और 31 दिसंबर 2020 को निजी प्लाट संख्या 244 हो जाती है। इसके बाद 3D के प्रकाशन जो की मुआवजा वितरण की घोषणा एवं स्वीकृति होती है 18 मार्च 2021 को प्रकाशित की गई उसमें स्वीकृति 312 प्रकरणों की दर्शायी जाती है। इसके साथ ही 11 नवंबर 2021 और 11 नवंबर 2022 को भी कुछ अन्य मुआवजा प्रकरणों की अधिसूचना अलग से भी जारी की जाती है, जिसमें 40 नई भूमि शामिल की जाती है। इसमें सबसे चौंकाने वाला नाम भूपेंद्र चंद्राकार पिता गिरधारी चंद्राकर निवासी कुरूद जिला धमतरी है। 26 अप्रैल 2022 को भी एक नयी अधिसूचना जारी की जाती है। इस प्रकार 3 नयी अधिसूचना जारी की जाती है।
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इसी प्रकार ग्राम उरला में 2019 में जारी अधिसूचना में 77 निजी प्लाट संख्या दर्शायी जाती है। 30 जनवरी 2020 को निजी प्लाट संख्या 80 और 31 दिसंबर 2020 को निजी प्लाट संख्या 89 हो जाती है। आगे निजी प्लाट संख्या बढ़ कर 99 हो जाती है। ग्राम उरला के 3D प्रकाशन और मुआवजा वितरण तक निजी प्लाट संख्या 211 हो जाती है साथ ही इनको मुआवजा मिल भी जाता है। सबसे ज्यादा भर्राशाही और धांधली नायकबांधा और उरला में ही की गई। इस कोरिडोर के अन्य गांवों में मुआवजा अवार्ड सूची क्रम से है परंतु इन दोनों गांवों में मुआवजा अवार्ड सूची क्रम में नहीं है, कारण जिससे पूरा मामला कभी पकड़ में ही नहीं आ पायें।
इसके साथ ही बड़ी भारी मात्रा में कृत्रिम बंटाकांन, नामांतरण, भूमि उपयोग परिवर्तन कर लाखों की मुआवजा राशि को करोड़ों में परिवर्तित कर दिया गया। अगले अंकों में हम विस्तारपूर्वक सभी खसरों और भू स्वामियों के वास्तविक मुआवजा राशि और दी गई मुआवजा राशि के अंतर और की गई आर्थिक धोखाधड़ी को भी उजागर करेंगे।
अब बात करते हैं जांच प्रतिवेदन पर, 11 सितंबर 2023 को तात्कालिक रायपुर कलेक्टर को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन। जिसे जांच अधिकारी और तात्कालिक अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पंचभाई और तात्कालिक संयुक्त कलेक्टर निधि साहू ने प्रस्तुत किया था। इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि जानबूझकर भू अर्जन से प्रभावित भू स्वामियों को वास्तविक मुआवजा राशि से अधिक मुआवजा राशि का भुगतान किए जाने और उन्हें अनुचित लाभ दिलाए जाने के उद्देश्य से शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया।
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राजस्व विभाग के कर्मचारी-अधिकारियों सहित संबंधित भूस्वामियों से मिलकर भू अर्जन हेतु धारा 3 (क) की अधिसूचना जारी होने एवं प्रकाशन के पश्चात पिछली तारीख में खाता विभाजन प्रकरण मैन्युअल रूप से कूट रचित प्रकरण तैयार किया गया है। राजस्व प्रकरण को ई-कोर्ट में दर्ज करने से प्रकरण किस तारीख को प्रारंभ हुआ है। यह स्पष्ट हो जाता इसलिए खाता विभाजन प्रकरणों को जानबूझकर ई-कोर्ट में दर्ज नहीं किया गया। छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता की धारा 178 एवं 178 (क) के प्रावधानों के विपरीत प्रभावित भूमि का अवैध रूप से खाता विभाजन एवं खसरों की बटांकन की कार्यवाही की गई है। जिससे निजी स्वामियों को वास्तविक मुआवजा राशि में वृद्धि हुई है। इससे शासन को आर्थिक क्षति हुई.
भारत माला प्रोजेक्ट घोटालों पर इनसाइड स्टोरी और एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट -7(संपूर्ण दस्तावेज़ी साक्ष्यों, साक्षात्कार और ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित)