Operation Sindoor: कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख और पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड मसूद अजहर अब टूट चुका है। पाकिस्तान और POK (पाक अधिकृत कश्मीर) में भारतीय वायुसेना की लक्षित कार्रवाई में उसके परिवार के 14 सदस्यों, जिनमें उसका सगा भाई भी शामिल है, की मौत हो गई है। यह कार्रवाई बहावलपुर सहित 9 आतंकी ठिकानों पर की गई, जहां स्थित उसके मदरसे पर भी चार मिसाइलें दागी गईं, जिससे पूरी इमारत तहस-नहस हो गई।
पाकिस्तानी मीडिया ने भी इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया है कि भारत की इस जवाबी कार्रवाई में मसूद का परिवार, ठिकाने और नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बताया जा रहा है कि मसूद अजहर ने बेहद भावुक होकर कहा —
“मेरे परिवार के लोग मारे गए, अच्छा होता कि मैं भी मारा जाता।”
इस ऑपरेशन को भारतीय वायुसेना ने खुफिया जानकारी के आधार पर अंजाम दिया।
बहावलपुर, जहां मसूद अजहर का प्रमुख मदरसा था, उसे टारगेट कर मिसाइलें दागी गईं। यह वही इलाका है जहां से जैश-ए-मोहम्मद अपने फिदायीन आतंकियों को प्रशिक्षण देता था और भारत के खिलाफ साजिशें रचता था।
9 आतंकी ठिकानों पर की गई इस एयर स्ट्राइक में सिर्फ मसूद का ही नहीं, बल्कि कई अन्य वांछित आतंकियों के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है।
मौलाना मसूद अजहर, प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है।
साल 2019 के पुलवामा हमले की जिम्मेदारी इसी संगठन ने ली थी, जिसमें भारत के 40 CRPF जवान शहीद हो गए थे।
इससे पहले पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले में भी इसी संगठन का हाथ था।
मसूद अजहर को 1999 में कंधार हाईजैक के दौरान भारत सरकार को मजबूरन रिहा करना पड़ा था।
मसूद अजहर की यह स्वीकारोक्ति — "काश मैं भी मारा जाता" — एक आतंकवादी के आत्मगत पराजय को दर्शाता है। भारत की सर्जिकल नीति ने न केवल उसके ठिकानों को नष्ट किया है, बल्कि उसकी साइकोलॉजिकल पकड़ को भी कमजोर किया है।