पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर : ग्राम सेवा समिति की पंडरी स्थित बेशकीमती जमीन का विवाद विकराल रूप ले कर फिर सामने आया है। समिति के बुनकरों और उनके परिजनों ने रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा से शिकायत की है कि स्वयंभू ट्रस्टी अजय तिवारी ने उनके मालिकाना हक की जमीन भूमाफिया हरिबल्लभ अग्रवाल को बेच दी है। जिसके चलते भूमाफियाओं द्वारा इस पर अवैध कॉलोनी बनाई जा रही है और लगभग 60 वर्षों से निवास कर रहे बुनकरों के परिवारों को डराया-धमकाया जा रहा है साथ ही उनके घरों की बिजली और पानी भी काट दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आज रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, ज़ोन अध्यक्ष प्रमोद साहू, स्थानीय पार्षद सहित कई जनप्रतिनिधियों ने इस जगह का मुआयना किया साथ ही बुनकरों और उनके परिजनों की पीड़ा को जाना और समझा। पत्रकारों से बातचीत में विधायक पुरंदर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि " कोई भी भूमाफिया विष्णु देव सरकार में पैर नहीं पसारेगा यदि पैर पसारेगा तो पैर काट दिया जायेगा।" उन्होंने स्थानीय निवासियों को ठोस आश्वासन भी दिया है कि इस पूरे मामले में कलेक्टर, रायपुर, कमिश्नर,नगर निगम सहित सभी बड़े अधिकारियों से चर्चा कर जल्द ही इस मामले का निराकरण किया जायेगा।
बुनकरों का सीधा आरोप है कि अजय तिवारी ने स्वयंभू ट्रस्टी बन कर इस जमीन पर कब्जा कर रखा है और उसका इस भूमि पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अजय तिवारी ने भूमाफिया हरिबल्लभ अग्रवाल के साथ मिलकर उन्हें अपने ही जमीन से बेदखल करने की साजिश रची है। बुनकरों के अनुसार उनके घरों के आसपास अवैध रूप से सड़कें बनाई जा रही हैं, उनके घरों की बिजली और पानी के कनेक्शन को काट दिया गया हैं, ताकि वे अपना घर छोड़कर चले जाएं। इस मामले में रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, ज़ोन -3 के अध्यक्ष प्रमोद साहू और स्थानीय पार्षद सहित कई जनप्रतिनिधियों के दौरे से शिकायतकर्ताओं को अपनी बेशकीमती जमीन बच जाने की उम्मीद जगी है।
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में लगातार संभाग आयुक्त, रायपुर, कलेक्टर, रायपुर , कमिश्नर, नगर निगम और पंजीयक न्यास रायपुर के समक्ष आवेदन दिए हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस निष्क्रियता के कारण अजय तिवारी और हरिबल्लभ अग्रवाल का हौसला बढ़ा हुआ है। बुनकरों के घरों के आसपास लगातार मलबा डालकर सड़कें बनाई जा रही हैं, जिससे ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है कि वे अपना घर छोड़ दें और हरिबल्लभ अग्रवाल अवैध कॉलोनी बनाकर जमीन बेच सकें।
दरअसल पूरा मामला यह है कि स्वतंत्रता संग्राम के युद्ध में स्वदेशी खादी वस्त्रों को बढ़ावा देने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा हर संभव प्रयास क्या जाता था। उस अलख को जीवित रखने के लिए आजादी के तुरंत बाद स्वतंत्रता सेनानीयों द्वारा अपने अंशदान से वर्ष 1948 से पंजीकृत खादी बुनकर मजदूरों की संस्था के लिए खादी उत्पादन केंद्र एवं भंडार गृह खोलने ग्राम पंडरी में 11.73 एकड़ जमीन चार पंजीकृत विक्रय पत्रों द्वारा खरीदी थी।
वर्ष 1961 में राजस्व अभिलेखों में अपना नाम चढ़ाने के पश्चात् खादी वस्त्रों के निर्माण, विक्रय एवं बुनकरों के निवास निर्माण करने के लिए तत्कालीन संचालक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वैंकटेश कोहाड़े द्वारा अनुविभागीय अधिकारी को वर्ष 1963 में आवेदन देकर तात्कालिक खसरा नंबर 267, 268, 269, 270, 271, 272, 273, 274, 275, 276, 281, 282, 283, 298, 299/1क, 299/1घ, 299/1छ, 299/1, 300/1 रकबा 10.38 एकड़ डायवर्सन कराया था।
जिसे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा 21 अक्टूबर 1963 को मंजुरी दिए जाने के पश्चात् राजस्व विभाग के परिवर्तित संधारण खसरा शीट नंबर 28 के प्लाट नंबर 1,2,3,4,5 एवं 6 देकर दर्ज किया गया था जो कि वर्ष 1964 से लगातार ग्राम सेवा समिति के नाम पर दर्ज चला आ रहा। पंरतु कुछ वर्षों पूर्व भूमाफियाओं की इस बेशकीमती जमीन पर नजर गढ गयी और इस पर कब्जा करने के लिए उन्होंने साम,दाम, दण्ड भेद सभी हथकंडे अपनाना शुरू कर दिया।
अब देखने वाली बात यह है कि जहां करोड़ों के इस मामले में राजधानी के बड़े अफसरों ने चुप्पी साध कर पिडितों के आवेदनों को कूड़ेदान में डाल कर अपनी आंखों और कानों को बंद कर लिया है तब विधायक पुरंदर मिश्रा की यह बात की " कोई भी भूमाफिया विष्णु देव सरकार में पैर नहीं पसारेगा यदि पसारेगा तो पैर काट दिया जायेगा।" कितनी सही साबित होती है ?