June 21, 2025

राजधानी में भूमाफियाओं की दरिंदगी और मानवीय सरोकार, संवेदना और संघर्ष की दास्तां....


पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर. रायपुर न्यूज नेटवर्क और आर.एन.एन.24 न्यूज चैनल एक ऐसी खबर आप तक पहुंचा रहा हैं की आप के भी पैरों तले जमीन खिसक जायेगी। राजधानी रायपुर में शहर के सबसे व्यस्ततम इलाके की बेशकीमती जमीन का एक बड़ा मामला सामने आया है। दरअसल ग्राम सेवा समिति की पंडरी स्थित 12 एकड़ भूमि का ये मामला भूमाफियाओं की काली करतूतों और मानवीय संघर्ष का एक मार्मिक चित्रण को सामने लाता है। आजादी के तुरंत बाद पूरे भारत के नवनिर्माण, ग्राम उत्थान, स्वदेशी और ग्रामीण रोज़गार मुखी विकास की अवधारणा का जो सपना था उसके लिए सब एक जुट होकर प्रयास कर रहे थे।



तात्कालिक रायपुर और छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानीयों ने भी इस दिशा में काम शुरू किया। मंहत लक्ष्मीनारायण दास, नंदकुमार दानी, व्यंकटेशराव कोहाडे जैसे छत्तीसगढ़ के सपूतों ने 1948-49 में ग्राम सेवा समिति का गठन कर इस काम को आगे बढ़ाया। अंग्रेजों के 1860 में स्थापित एक कानून के अनुसार इसका पंजीयन भी कराया। अब आप समझ सकते हैं कि छत्तीसगढ़ के उन सपूतों की दूरदर्शिता और ज्ञान को जो इस समिति को कानूनी अमलीजामा पहना कर और सब को कानूनी दायरे में लाकर सहकारिता की एक बहुत बड़ी मिसाल पेश की।


उस दौरान जब शिक्षा की पहुंच और संसाधनों की उपलब्धता बहुत सीमित थी तब इन लोगों ने कई बड़ी संस्थानो को स्थापित किया था।


ग्राम सेवा समिति का मुख्यालय जेल रोड में स्थित कचहरी चौक के बाल आश्रम में बनाया और ग्रामोद्योग को बढ़ाने पंडरी में कारखाने की शुरुआत की। इस कारखाने में खादी के सूत, खादी के कपड़े, फर्नीचर, सहित दर्जनों चीजों के उत्पादन के साथ एक बड़ी गौशाला का भी निर्माण किया गया था। यहां के उत्पादित समानों के लिए इसी जगह पर एक विक्रय केन्द्र की भी स्थापना की गयी था।


1965 में इस जमीन को समिति के सदस्यों ने 19 नये पैसे प्रति फुट के हिसाब से खरीद था। उस जमाने में एकड़ों की भूमि को फुट की दर से खरीदी करना यह बताता है की यह सहकारी समिति कितने ज्यादा प्रॉफिट में चल रही थी। यहां पर सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला था। समिति के सदस्यों ने लाभ से प्राप्त पैसों का सदुपयोग करते हुए पक्के मकानों का निर्माण किया अपने व्यवसाय को आधुनिक रूप दिया। इसके साथ ही तात्कालिक सरकारों ने ना सिर्फ इनकी मदद की बल्कि एकड़ों में जमीन भी दी। समिति ने विस्तार किया और खुद भी कई जमीनों को खरीदा।


कुछ सालों पहले तक यहां पर सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला था। फिर भूमाफियाओं की नजर इस समिति और इसकी बेशकीमती जमीनों पर गड़ गई। यहां से शुरू हुआ भूमाफियाओं के लालच और मानवीय संघर्ष की मार्मिक कहानी। आज भी इन बुनकर सदस्यों और उनके परिजनों ने इस जमीन को बचाने की लड़ाई को जारी रखा है। यहां रह रहे दर्जनों परिवारों की मूलभूत सुविधाओं बिजली-पानी को भी काट दिया गया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ये दर्जनों परिवार सोलर लाईट और टैंकरों से मिले पानी में अपना गुजारा कर रहे हैं। समिति के पुराने प्रबंधक बेहरा जी की बुजुर्ग पुत्री और उनके दामाद ने अपनी व्यथा आंसूओं के साथ बताई।


पिछले दिनों समिति के बुनकरों ने रायपुर संभाग आयुक्त से शिकायत की है कि स्वयंभू ट्रस्टी अजय तिवारी ने भूमाफिया हरिबल्लभ अग्रवाल को यह भूमि बेच दी है, जिस पर अवैध कॉलोनी बनाई जा रही है और लगभग 50 वर्षों से निवास कर रहे बुनकरों के परिवारों को डराया-धमकाया जा रहा है। बुनकरों का आरोप है कि अजय तिवारी, जिसका इस भूमि पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है, उन्होंने हरिबल्लभ अग्रवाल के साथ मिलकर उन्हें बेदखल करने की साजिश रची है। बुनकरों के अनुसार उनके घरों के आसपास अवैध रूप से सड़कें बनाई जा रही हैं, बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जा रहे हैं, ताकि वे अपना घर छोड़कर चले जाएं। इस मामले में पीड़ितों ने अपनी व्यथा बहुत ही मार्मिक पीड़ा के साथ व्यक्त की।


सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक उदासीनता का है। ये लोग लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं से गुहार लगा रहे हैं। परंतु सरकार सो रहे हैं।

एक साल पहले रायपुर नगर निगम के ज़ोन 3 ने हरिवल्लभ अग्रवाल से भू स्वामित्व के दस्तावेज मांगे थे। पंरतु उसने आज तक जमा नहीं किये। जब पीड़ितों ने ज़ोन कमिश्नर से इस पर बात की तो ज़ोन कमिश्नर इस जगह के मौके का मुआयना किया और सिर्फ आश्वासन देकर रवाना हो गए। पीड़ितों ने बताया कि जोन क्रमांक 3 द्वारा पहले भी अजय तिवारी और हरिबल्लभ अग्रवाल को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बुनकरों ने आरोप लगाया है कि कलेक्टर, पंजीयक न्यास, क्षेत्रीय विधायक पुरंदर मिश्रा और जोन आयुक्त 3 को लगातार आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, और उलटा उन्हें धमकाया जा रहा है कि “शिकायत करना है तो कर लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस मामले में जब हमने ज़ोन के ईई से संपर्क किया तो उन्होंने स्पष्ट कहा की उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में लगातार रायपुर कलेक्टर और पंजीयक न्यास रायपुर के समक्ष आवेदन दिए हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस निष्क्रियता के कारण अजय तिवारी और हरिबल्लभ अग्रवाल का हौसला बढ़ा हुआ है। बुनकरों के घरों के आसपास लगातार मलबा डालकर सड़कें बनाई जा रही हैं, जिससे ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है कि वे अपना घर छोड़ दें और हरिबल्लभ अग्रवाल अवैध कॉलोनी बनाकर जमीन बेच सकें।

ग्राम सेवा समिति में काम करने वाले बुनकर और उनके परिवार लगभग 50 सालों से इस भूमि पर निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह संस्था उन्हीं के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब उनकी कीमती भूमि को भूमाफिया हरिबल्लभ अग्रवाल को बेचने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वे बेहद परेशान हैं।

बुनकरों ने संभाग आयुक्त से अनुरोध किया है कि वे तत्काल भूमाफिया हरिबल्लभ अग्रवाल के अवैध निर्माण को रोकें और अजय तिवारी व हरिबल्लभ अग्रवाल के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई करें। उन्होंने गुहार लगाई है कि उन्हें बेघर होने से बचाया जाए और पंजीकृत न्यास की भूमि को संरक्षित कर उनके परिवारों को संरक्षण प्रदान किया जाए। इस मामले में कमिश्नर महादेव कांवरे ने क्या कहा की हम इस मामले की जांच करवाते हैं। मामला बहुत गंभीर है।

इस पूरे मामले की और भी कई तहे है जिसका हम खुलासा करेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि अजय तिवारी कांग्रेस के बड़े नेताओं से जुड़ा है और हरिवल्लभ अग्रवाल भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं से जुड़ा है। इससे आप समझ सकते हैं मामला कितना गंभीर है। इन परिवारों को आप के समर्थन की जरूरत है और हम ये मानते हैं कि मानवीय सरोकार, संवेदनाओं और संघर्ष की जीत होगी।



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