June 25, 2025

स्वयंभू ट्रस्टी बन अजय तिवारी और महेंद्र अग्रवाल मंदिर ट्रस्ट की भूमियों को अवैधानिक रूप से विक्रय कर आर्थिक अनियमितता कर रहे हैं- महंत राम आशीष दास ( पार्ट -2 )


रायपुर. महंत राम आशीष दास ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया कि कलेक्टर कार्यालय के रिकार्ड रूम एवं तहसील कार्यालय में रखे दस्तावेज शासकीय दस्तावेज है, जिसके प्रमुख कलेक्टर रायपुर है, वहां दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर सफेदा लगाना कूटरचना का आरोप सीधे-सीधे कलेक्टर रायपुर पर लगाया गया आरोप है। सचिव महेन्द्र अग्रवाल जो वर्ष 1983 से जैतुसाव मठ के ट्रस्टी है और 1984 से जैतुसाव मठ के सचिव है। ट्रस्टो की भूमि का लगातार विक्रय होना और ट्रस्ट भूमि विक्रय से प्राप्त राशि का लगातार गबन होना एक बड़े स्तर का आर्थिक अपराध है।


ग्राम धरमपुरा प.ह.न. 78 में जैतुसाव मठ ट्रस्टो की भूमि में हुए फर्जी रजिस्ट्री एवं नामांतरण की शिकायत मेरे द्वारा बतौर महंत रामआशीष दास लगातार विभिन्न न्यायालयों में की गई है। प्रकरण क्रमांक 202401113000039 आदेश दिनांक 28/08/2024 , इसी प्रकार प्रकार अन्य प्रकरण क्रमांक 202401113000040 आदेश दिनांक 28/08/2024, प्रकरण क्रमांक 202401113000038 आदेश दिनांक 28/08/2024, 202401113000035 आदेश दिनांक 28/08/2024, प्रकरण क्रमांक 202401113000036 आदेश दिनांक 28/08/2024 में वर्ष 1987 से लेकर 2007 तक हुए ट्रस्ट भूमि के अवैध विक्रय नामांतरण पंजीयन को माननीय प्रबंधक कलेक्टर रायपुर के द्वारा जांच अपर कलेक्टर से कराकर ट्रस्ट की भूमियों का अवैध नामांतरण विक्रय पाये जाने पर वर्तमान में पंजीयक लोक न्यास रायपुर से सभी अवैध पंजीयन नामांतरणों को निरस्त करने की कार्यवाही हेतु भेजा गया है। इस कार्यवाही की जानकारी महेन्द्र कुमार अग्रवाल को पंजीयक न्यास द्वारा नोटिस के माध्यम से दी गई।

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जिससे इनके अवैधानिक कृत्यों का खुलासा होने वाला है और ये अपराध के रूप में दर्ज होगा। ट्रस्ट भूमियों के अवैध विक्रय एवं नामांतरण में ट्रस्ट के स्वयंभू पदाधिकारी अजय तिवारी जो स्वयं एक भू-माफिया है और उनके द्वारा की गई कूटरचना में कार्यवाही होने का पता चला तो वर्ष 1984 से बैठे सचिव महेन्द्र कुमार अग्रवाल जो इस सब कूटरचना और बड़े पैमाने पर ट्रस्ट की भूमि विक्रय से प्राप्त राशि के गबन में शामिल है तिलमिला गए हैं।


स्वयंभू सचिव महेंद्र अग्रवाल अपने साथ साथ अजय तिवारी भू-माफियाओं को होने वाली वैधानिक कार्यवाही एवं वर्तमान में ट्रस्ट की भूमि जो अन्य लोगो द्वारा अपने नाम पर दर्ज करा ली गई है एवं पंजीयक, लोक न्यास की कार्यवाही पश्चात वर्तमान में जिसका मूल्य करोड़ो रूपय है की लगभग 107 एकड़ भूमि मठों को वापस होने वाली है से बचने के लिए दैनिक समाचार पत्रो में प्रकाशित समाचारों के माध्यम से इस प्रकार का आरोप लगाया जा रहा है। ताकी पंजीयक न्यास रायपुर में लंबित प्रकरणों में मै बतौर महंत रामआशीष दास उपस्थित न हो सकू और प्रकरणों को निराकरण होने से रोका जा सके।


ग्राम धरमपुरा प.ह.न. 78 जैतुसाव मठ ट्रस्ट की भूमि में वर्तमान फर्जी ट्रस्टी अजय तिवारी द्वारा अपने आप को महंत लक्ष्मीनारायण दास का फर्जी उत्तराधिकारी बनकर किये गये अवैधानिक नामांतरण वर्ष 1989 अवैधानिक विक्रय वर्ष 2000 को निरस्त करने का प्रकरण मेरे द्वारा बतौर महंत रामआशीष दास विरूद्ध अजय तिवारी प्रकरण क्रमांक 202401113000036 आदेश दिनांक 28/08/2024 जो पंजीयक सार्वजनिक न्यास रायपुर के समक्ष लोक न्यास अधिनियम की धारा 14 का उलंघन पाये जाने पर होने वाली कार्यवाही से संरक्षण प्रदान करने और प्रकरण को निराकरण होने से रोकने अजय तिवारी से साठ-गाठ कर ट्रस्ट भूमि को वर्तमान में खरीदने वाले रसूखदार व्यक्तियों को बचाने और करोड़ो रूपय जो ट्रस्ट की भूमि को विक्रय कर अजय तिवारी द्वारा प्राप्त किया गया है जो ट्रस्ट के खाते में जाना था वह गबन कर लिया गया है। जो कि एक आर्थिक अपराध है एवं इसमें महेन्द्र कुमार अग्रवाल भी शामिल है। ये सभी आरोपी अपने कुकर्मों की सजा से बचने के लिए मुझपर आरोप लगाकर समाचार प्रकाशन करवा रहे है, और पंजीयक लोक न्यास के समक्ष लंबित प्रकरणों को रोकने एवं प्रभावित करने का प्रयास कर रहे है।

यह कि, ग्राम सेजबहार प.ह.न. 119 में ट्रस्ट की भूमि पर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के द्वारा जारी स्थगन आदेश 18/04/1984 के बाद स्व. महंत लक्ष्मीनारायण दास द्वारा ट्रस्ट की भूमि को निजी भूमि बताकर बनाये गये फर्जी वसीयतनामा दिनांक 18/10/1984 जिसमें बतौर गवाह अजय तिवारी द्वारा ट्रस्ट की लगभग 29 एकड़ ट्रस्ट की जमीन वर्ष 2000 में नामांतरण विक्रय किया गया जिस पर वर्तमान में कार्यवाही होने से डरकर कलेक्ट्रेट रिकार्ड रूम के कर्मचारीयों पर आरोप लगाकर दैनिक समाचार पत्र में झूठा समाचार भी प्रकाशित कराया जा रहा है। इसी प्रकार ग्राम धरमपुरा में गोपीदास मंदिर, हनुमार मंदिर, बिरंचीनारायण मंदिर स्व. महंत लक्ष्मीनारायण दास प्रबंधक कलेक्टर के नाम पर दर्ज लगभग 60 एकड़ भूमि जो अधिकार अभिलेख 1954 में दर्ज थी को बिना प्रबंधक (कलेक्टर), पंजीयक सार्वजनिक न्यास की अनुमति प्राप्त किये बेच दिया गया है और करोड़ो रूपय का गबन कर लिया गया है। इस प्रकरण में होने वाली कार्यवाही से बचने के लिए ऐसा भ्रामक समाचार महेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा प्रकाशित कराया जा रहा है। जैतुसाव मठ, गोपीदास मंदिर, हनुमान मंदिर, बिरंचीनारायण मंदिर क्योंकि ये सभी सार्वजनिक न्यास है एवं समस्त मंदिरों के संचालन के लिए पूर्व में हिन्दू धर्मावलंबियों द्वारा बड़ी मात्रा में भूमि दान की गई थी। ग्राम धरमपुरा, सेजबहार में स्थित सभी न्यास भूमियों में प्रबंधक कलेक्टर के रूप में नाम दर्ज है। और वर्ष 1987 से वर्ष 2007 और वर्तमान 2025 तक इस ट्रस्ट भूमियो का बिना आपकी अनुमति के विक्रय होना एवं स्वयंभू ट्रस्ट सचिव के रूप में प्रचार प्रसार करने वाले महेन्द्र कुमार अग्रवाल द्वारा बेची गई ट्रस्ट भूमि जो कि ट्रस्ट एवं मंदिरों की संपत्ति थी कूटरचना एवं जालसाजी कर विक्रय की गई है और प्राप्त राशि जो वर्तमान में ट्रस्ट के किसी भी खाते में जमा नही की गई है।


अतः ये करोड़ो रूपय का गबन, जालसाजी, आर्थिक अपराध एवं हिन्दू धर्माविलंबियों की आस्था के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ है। वर्तमान में भी ट्रस्ट की भूमि का बड़े पैमाने पर विक्रय किया जाना भी एक गंभीर एवं आर्थिक अपराध का विषय है, 2023 के नये लागू किये गये बी.एन.एस. की विभिन्न धाराओं में सजा एवं जुर्माने का प्रावधान है। ये विषय अत्यंत ही चिन्तनीय एवं अपराधिक प्रवृत्ति का है। अतः संभाग आयुक्त, रायपुर एवं कलेक्टर, रायपुर से आपके माध्यम से निवेदन है कि इस पर तत्काल सज्ञान लेकर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए, एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी से कराया जाना ट्रस्टहित, न्यायहित, जनहित एवं हिन्दू धर्माविलंबियों की आस्था में अतिआवश्यक है। यदि इस पर तत्काल प्रशासनिक रूप से कोई बड़ा कदम नही उठाया जाता तो अरबों रूपय की न्यास भूमि सहित मंदिरों में हिन्दू धर्माविलंबियों द्वारा दी गई नगद राशि, स्वर्ण आभूषण अनेक कीमती पात्र की रक्षा कैसे हो सकेगी।

वर्ष 1984 से महेन्द्र कुमार अग्रवाल और अजय तिवारी इस सभी मठों के स्वयंभू पदाधिकरी है तो बिना इनकी सहमति एवं जानकारी के विगत 45 वर्षों मे ट्रस्ट की भूमि का अवैध विक्रय नामांतरण होना संभव ही नही है। और न ही इनके द्वारा विगत 45 वर्षों में कोई वैधानिक कार्यवाही नही किया जाना प्रमाणित करता है कि इन सब कूटरचनाओं में ये शामिल है।



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