पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़ : विष्णु का सुशासन" छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार की इस टैग लाइन को पलीता लगाने और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की आंखों में धूल झोंक कर गबन- घोटाले का एक भी मौका और स्वर्णिम काल अपेक्स बैंक प्रबंधन छोड़ना को तैयार नहीं है। छत्तीसगढ़ में राज्य सहकारी बैंक जिसे हम अपेक्स बैंक के नाम से भी जानते हैं वर्तमान में आर्थिक अनियमिता, भष्ट्राचार और गबन घोटालों का गढ़ बना हुआ है।
पिछले चार माह से सारंगढ़ जिले की बरमकेला ब्रांच में हुए करोड़ों रूपए के गबन और घोटाले को लेकर आज तक सिर्फ जांच के नाम पर लीपापोती ही की जा रही है। जांच अधिकारी उप महाप्रबंधक भूपेश चंद्रवंशी और लेखाधिकारी विवेक ठाकुर की प्रारंभिक रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने, विस्तृत जांच और विशेष आडिट सहित करोड़ों की राशि के गबन की बात अनुशंसित होने के बाद भी आज तक अपराध पंजीबद्ध नहीं कराया गया है।
रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल ने चार खबरें प्रकाशित और प्रसारित कर पूरे मामले का विस्तृत भांडाफोड किया था। पंरतु मोटी चमड़ी का बैंक प्रबंधन अपराध पंजीबद्ध कराने की जगह 27 फरवरी गुरुवार को सभी आठों आरोपियों को नवा रायपुर स्थित मुख्यालय बुला कर गबन की गई राशि को जमा करने का आदेश दे देता है ताकि मामले को रफा-दफा कर बैंक के पैसों की अफरातफरी तय कर सकें। प्रबंधन को मालूम है कि करोड़ों रुपए जो गबन किये गये उस पूरी राशि की रिकवरी संभव नहीं है। कुछ राशि बैंक में और कुछ राशि जेबों में जमा करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
ये पूरा गबन-घोटाला बगैर मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण के संभव ही नहीं था। विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अप्रैल 2024 से नवंबर 2024 तक ही बरमकेला ब्रांच से 20 करोड़ से ज्यादा की अफरातफरी की गई है। इसमें पूर्व में भूमि विकास बैंक के मर्ज होने के बाद आयें हुए अधिकारी अभिषेक तिवारी और हेमंत चौहान सहित उनके साथियों की भूमिका बहुत ही संदिग्ध है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि करोड़ों रुपए की राशि पैकेटों और बैगो में भरकर तात्कालिक शाखा प्रबंधक डी.आर.बाघमारे ने अपने ही अधिनस्थ कर्मचारी मंहत के हाथों रायगढ़ निवासी अपनी महिला मित्र और दामोदर नामक व्यक्ति को पहुंचाये थे।
बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि महिला मित्र ने ये राशि बैंक प्रबंधन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई थी। और इसमें से कुछ राशि अपने पास रख कर रायगढ़ में ही बहुत आलीशान मकान बनवाया गया है। इस पूरे मामले में बरमकेला ब्रांच के पूर्ववर्ती शाखा प्रबंधक और वर्तमान में सारंगढ़ शाखा में पदस्थ संजय साहू और पूर्ववर्ती बरमकेला शाखा प्रबंधक और वर्तमान में सारंगढ़ जिला नोडल अधिकारी हेमंत चंद्राकर की भूमिका भी अत्यंत ही संदिग्ध है। हेमंत चंद्राकर ने खरसिया शाखा में पदस्थापना के दौरान लाखों रुपए की अफरातफरी की थी जिसमें से 1.50 लाख रुपए उसने दो माह पूर्व ही खरसिया शाखा में जमा कराए हैं क्योंकि जांच में फिलहाल ये राशि का गबन पकड़ लिया गया था।
प्रबंध संचालक के.एन.कांडे ने आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों में से अरुण चंद्राकर को 19 लाख, खीरदास महंत को 3 लाख सहित बैंक के नियमित कर्मचारी आशीष पटेल को 9 लाख रुपए 3 मार्च सोमवार को मुख्यालय में जमा करने का मौखिक आदेश दिया है। सात आरोपियों से दिनभर पूछताछ के नाटक के बाद मुख्य आरोपी तात्कालिक शाखा प्रबंधक डी.आर.बाघमारे को देर शाम बुलाया गया और बंद कमरे में बातचीत की गई। इससे समझा जा सकता है कि पूरे मामले में अपराध पंजीबद्ध ना करके लीपापोती किस स्तर पर की जा रही है।
जहां रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 डिजिटल न्यूज चैनल की टीम पूरे 5 घंटे तक प्रबंध संचालक के.एन.कांडे से मिलकर बैंक का पक्ष जानने का इंतजार किया पंरतु उन्होंने हमसे बात करने से इंकार कर दिया।
वहीं कुलदीप शर्मा, आईएएस अधिकारी जो वर्तमान में पंजीयक और आयुक्त, सहकारिता है ने कहा कि इस मामले की विस्तृत जांच की जा रही है आरोपियों को बक्शा नहीं जाएगा कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित रूप से की जायेगी।