July 07, 2025

तथाकथित ट्रस्टी अजय तिवारी ने कूटरचना कर 5.5 एकड़ बेशकीमती जमीन हड़प कर बेची - मंहत राम आशीष दास, आयुक्त रायपुर ने दिये हाई पावर कमेटी को जांच के आदेश...


पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी में भूमाफियाओं और उनके दलालों के नित नए मामले उजागर हो रहें हैं। हाल ही में मंहत राम आशीष दास की शासन से की गई शिकायत और प्रस्तुत दस्तावेजों से एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस खुलासे से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कांवरे ने इस मामले में एक हाई पावर कमेटी का गठन कर जांच प्रतिवेदन 15 दिनों में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। बी.आर जोशी उपायुक्त रायपुर संभाग की अध्यक्षता में गठित इस 4 सदस्यीय समिति में राममूर्ति दीवाना तहसीलदार रायपुर को भी शामिल किया गया है। जांच समिति मुख्य रूप से जांच के दो बिन्दुओं पर जांच कर अपना जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगी।

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पहला की धरमपुरा स्थित खसरा नं 302/3 रकबा 5.50 एकड़ जमीन जो महंत लक्ष्मीनारायण दास, गणेश दास एवं प्रबंधक, कलेक्टर रायपुर के नाम पर दर्ज था किस-किस दस्तावेजों के आधार पर अजय तिवारी के नाम पर दर्ज की गई और ट्रस्ट, प्रबंधक कलेक्टर, पंजीयक सार्वजनिक न्यास, रायपुर या किस न्यायालय के आदेश से कब इस विषय में आदेश प्राप्त किया गया।

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दूसरा धरमपुरा स्थित खसरा नंबर 302/58 रकबा 48.79 एकड़ भूमि जो श्री रामचन्द्र स्वामी जैतुसाव मठ, महंत लक्ष्मीनारायण दास एवं प्रबंधक, कलेक्टर रायपुर के नाम पर दर्ज भूमि थी को किन-किन दस्तावेजों या न्यायालिन आदेशों के आधार पर 88 बंटाकनो में बांटा गया। ये आदेश कब प्राप्त किया गया। वर्तमान में खसरा नंबर 302/58 के सभी बंटाकनो को जोड़ा गया तो कुल रकबा 49.79 एकड़ भूमि हो जाती है ये अतिरिक्त 1 एकड़ भूमि के कहां से आयी। क्या ये शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण है।

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इसी मामले में की गई एक शिकायत पर तात्कालिक अपर कलेक्टर, रायपुर द्वारा कलेक्टर, रायपुर को एक जांच प्रतिवेदन जो अगस्त 2024 का है, प्रस्तुत किया गया है। कलेक्टर रायपुर को प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में इस मामले की विस्तृत जांच के लिए लिख कर आग्रह किया गया है।

दरअसल यह पूरा मामला मंहत राम आशीष दास द्वारा शासन को प्रस्तुत दस्तावेजों और जांच की मांग से खुला है। राजधानी रायपुर के धरमपुरा इलाके में स्थित खसरा नंबर 302/1 रकबा 48.79 एकड़ भूमि अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 में श्रीरामचन्द्र जी स्वामी जैतुसाव मठ सर्वराकार महंत लक्ष्मीनारायण दास गुरू बिहारीदास के नाम पर दर्ज थी महंत लक्ष्मीनारायण दास ने पंजीयन दिनांक 26/01/1971 के माध्यम से 2.225 हे. भूमि को मंहत गणेशदास गुरू लक्ष्मीनारायण दास को विक्रय किया था। जिसका नामांतरण क्रमांक 42 ,दिनांक 16.11.1971 है। नामांतरण आवेदन पश्चात नामांतरण को अभिलेखों में किया गया। अभिलेखों में दर्ज दिनांक 10.04.1977 की प्रविष्टि के अनुसार विरासत हक के आधार पर मंहत गणेशदास के फौत हो जाने से ये भूमि खसरा नं. 302/5 को रकबा 5.50 एकड़ (2.225 है.) के वारिसान हक से पुनः मंहत लक्ष्मीनारायण दास के नाम पर दर्ज कर शासकीय अभिलेख में प्रविष्टि की गयी।


पंरतु 15.07.1986 को पुनः श्री गणेशदास के फौत का उल्लेख करते हुए फौती नामांतरण हेतु एक और नामांतरण प्रस्तुत गया जिसका क्रमांक 143 था। ये नामांतरण प्रस्तुत किया गया था अजय तिवारी द्वारा वो भी विधिक वारिसान के आधार पर। 2024 को तात्कालिक अपर कलेक्टर को जब इस मामले की जानकारी दी गई तो उन्होंने इस पूरे मामले की गहन जांच की और कलेक्टर रायपुर को प्रेषित जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट लिखा की जिस भूमि को पुनः वारिसान हक के आधार पर दर्ज कराया गया है वो त्रृटिपूर्ण है इसकी विस्तृत जांच कराया जाना चाहिए। इस भूमि में खातेदार का फौत होने से वारिसान हक में नाम दर्ज किए जाने के पश्चात पुनः मृतक खातेदार का नाम किस प्रकार से दर्ज किया गया और फिर किस आधार पर अजय तिवारी का नाम दर्ज किया गया। अजय तिवारी क्या खातेदार मंहत गणेशदास के विधिक वारिसान है के संबंध में कोई भी दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं किया गया है।

अपर कलेक्टर, रायपुर के इस जांच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि इस जमीन के लिए अजय तिवारी और राजस्व विभाग के अधिकारीयों-कर्मचारियों द्वारा मिली भगत कर इस पूरी कूटरचना को अंजाम दिया गया। विडम्बना देखिए की इस कूटरचना और नामांतरण के बाद कई टुकड़ों में इस जमीन को बेच भी दिया गया है।


अब देखने वाली बात यह होगी कि आयुक्त रायपुर द्वारा गठित हाई पावर कमेटी क्या जांच रिपोर्ट देती है और इस पर कब तक अपराध पंजीबद्ध कर भूमाफियाओं और उनके दलालों पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाती है।




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