पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक गतिविधियों की स्थिति अत्यंत ही दयनीय है। राज्य सरकार के सबसे बड़े वित्तीय बैंक अपेक्स के प्रबंध संचालक का थाना प्रभारी से जीवन निर्वहन भत्ते के आवेदन पर अभिमत मांगा जाना प्रशासनिक अराजकता और प्रबंधन की गैर जानकारी का सबसे बड़ा उदाहरण है।
इसके साथ ही घोटाले के मास्टर माइंड तात्कालिक शाखा प्रबंधक बरमकेला ने प्रबंध संचालक को शपथ पत्र प्रस्तुत कर यह भी बताया है कि गबन की गई राशि में से किन-किन अधिकारियों को कितनी-कितनी राशि कब- कब दी गई।
उस शपथ पत्र में जांच तो दूर अभी तक कारण बताओ नोटिस तक जारी नहीं किया गया है। जबकि बैंक की आंतरिक जांच में प्रथम दृष्टया 10 करोड़ की राशि का गबन और आर्थिक अनियमितता की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। जिसमें करोड़ों रूपए मुख्यालय में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों को नकद एवं बैंकों माध्यम से दी गई है। यदि शासन स्तर पर इसकी रायगढ़ - सारंगढ़ - जशपुर जिले में विस्तृत जांच करायी जाती है तो यह पूरा मामला 100 करोड़ से ज्यादा का निकलेगा।
रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल ने नवंबर 2024 में अपेक्स बैंक की बरमकेला ब्रांच में करोड़ों रूपए की आर्थिक अनियमितता और घोटाले का पर्दाफाश किया था। सारंगढ़ जिले के इस मामले में हमारे लगातार प्रयास और समाचार संकलन के बाद जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप से इस मामले में अपराध पंजीबद्ध किया गया। साथ ही इस मामले में कुछ अधिकारी-कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
इस मामले में तात्कालिक लेखाधिकारी मीनाक्षी मांझी जो घोटाले के वक्त अवकाश में थी उसे भी सह आरोपी बनाया गया था, जबकि प्रारम्भिक जांच में उसे निर्दोष बताया गया है। उसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी की गई और वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में जेल निरुद्ध है। तात्कालिक लेखाधिकारी मीनाक्षी मांझी ने मुख्यालय में जीवननिर्वाह भत्ते की मांग की है। जिस पर अपेक्स बैंक के एम.डी और मंत्री केदार कश्यप के ओ.एस.डी. के.एन.कांडे ने थाना प्रभारी, बरमकेला से जीवननिर्वाह भत्ते को प्रदान करने के लिए अभिमत मांगा है।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 53 में जीवन भत्ते के भुगतान का प्रावधान है। सेवा नियम, 1966 के अनुसार, जेल में बंद कर्मचारियों को जीवन भत्ते (subsistence allowance) का भुगतान किया जाता है, जब तक कि उन्हें सेवा से बर्खास्त या हटाया नहीं जाता। यह भत्ता निलंबन अवधि के दौरान दिया जाता है, और इसकी मात्रा मूल वेतन का 50% होती है, जो पहले 6 महीनों के लिए दी जाती है, और उसके बाद 75%. हो जाता है। यदि किसी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त या हटा दिया जाता है, तो जीवन भत्ता बंद कर दिया जाता है।
अपराध सिद्ध हो जाता है तो यदि किसी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त या हटा दिया जाता है, तो जीवन भत्ता बंद कर दिया जाता है। निलंबन की अवधि के दौरान, मामले की समीक्षा की जाती है और यदि निलंबन उचित पाया जाता है, तो उसे जारी रखा जाता है। इससे आप समझ सकते हैं कि छत्तीसगढ़ के किसानों के रीढ़ अपेक्स की स्थिति क्या है।
कुछ वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त में स्पष्ट बताया कि प्रबंध संचालक के गैर बैंकिंग पृष्ठभूमि की वजह से बैंक वित्तीय कुप्रबंधन का शिकार हो गया है। 2018 में कांग्रेस ने सत्ता संभालते ही 8 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि का किसानों का ऋण माफ़ कर दिया था और शासन से राशि की क्षतिपूर्ति भी की थी। पंरतु छः - सात सालों में ही बैंक के इन-बैलैंसस की राशि सैकड़ों करोड़ में फिर से पहुंच गई है। इसके लिए बैंक का उच्चतर प्रबंधन जिम्मेदार है।
इन सभी संदर्भ में बैंक के प्रबंधक संचालक के.एन.कांडे. से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने हमसे बात करने से इंकार कर दिया।
अगले अंकों में गबन की गई राशि के बंदरबांट का बड़ा खुलासा....2