July 17, 2025

तथाकथित स्वयंभू ट्रस्टी अजय तिवारी 2007 में जारी छत्तीसगढ़ सरकार के भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों की सूची में था अव्वल.


पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वर्ष 2000 में हुआ था। इसके गठन का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र और यहां के मूल निवासियों का विकास था। मगर गठन के 7 वर्ष के बाद ही भष्ट्राचार भयानक रूप से प्रतिबिंबित होने लगा। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह स्वयं कवर्धा और ठाठापूर जैसे अति पिछड़े और ग्रामीण अंचल से आते थे।

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वो आमजन की पीड़ा को भी जानते और समझते थे। तात्कालिक सरकार के नीति-निर्धारकों को महसूस हुआ कि बहुत ताकतवर राजनेताओं के सानिध्य में भष्ट्राचार में लिप्त अधिकारी-कर्मचारियों को लगाम लगाने की सख्त जरूरत है। तो तात्कालिक सरकार ने 2007 में राज्य के सबसे भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक कर दी।

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तात्कालिक सरकार द्वारा 2007 में जारी भ्रष्ट अधिकारी- कर्मचारियों की सूची में अजय तिवारी का नाम तात्कालिक प्रमुख सचिव और आईएएस राबर्ट हंरगडोला और तात्कालिक सचिव और आईएएस नारायण सिंह से भी ऊपर था। ये अपना मूल शिक्षा विभाग और मूल कार्य शिक्षक की भूमिका में नहीं वरन सचिव एवं मंत्री, ग्राम सेवा समिति-खादी ग्रामोधोग बन कर मठ-मंदिरों की जमीनों को बेच रहे थे।

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ईओडब्ल्यू लगातार अजय तिवारी के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति के लिए प्रयास करती रही परंतु तात्कालिक जांच अधिकारी को हीला-हवाला कर टरका दिया गया था। अजय तिवारी के मामलों में अभियोजन की स्वीकृति आज तक लंबित है। अभियोजन की स्वीकृति देने जिम्मेदार जीएडी विभाग ने इनके प्रकरणों की समीक्षा करना भी उचित नहीं समझा। इतना ही नहीं अजय तिवारी को मैदानी और संवेदनशील पद पर नियुक्ति न करने के स्थायी निर्देशों को भी नजरंदाज किया गया था।

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छत्तीसगढ़ के विभिन्न शासकीय विभागों में भ्रष्ट अमलें के मामले में पूर्ववर्ती मघ्यप्रदेश और जोगी सरकार के एक कद्दावर मंत्री के विश्वस्त सहयोगी रहे अजय तिवारी का नाम राजधानी के प्रशासनिक और राजनैतिक हलकों में बड़े ही रसूख से लिया जाता था। तब भी ये अजय तिवारी कई मठ-मंदिरों के स्वयंभू मठाधीश सहित कई महाविद्यालय, स्कूल और संस्कृत पाठशाला जैसे शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख बन कर कब्जा किए हुए थे। जब मध्यप्रदेश के कद्दावर मंत्री रायपुर जिले के अघोषित मुख्यमंत्री थे, तब अविभाजित रायपुर जिले की सीमारेखा मैनपुर से बागबाहरा, कोमाखान और चरामा से सरायपाली तक हुआ करती थी। इससे आप समझ सकते हैं शासकीय सेवारत भूमाफिया अजय तिवारी की करतूतों की पहुंच कहां तक थी। तब अजय तिवारी शिक्षा विभाग में बतौर शिक्षक कार्यरत थे।

आगे के अंकों में हम स्वयंभू ट्रस्टी और भूमाफिया अजय तिवारी की और करतूतों जैसे राजधानी के हृदय स्थल जयस्तंभ चौक के पास स्थित नयापारा के संस्कृत पाठशाला की बेशकीमती जमीन सहित दर्जनों मामलों को उजागर करेंगे।



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